Saturday, 7 August 2021
Plan Head
Thursday, 5 August 2021
Difference between Zero Base Budget & Performance Budget
Zero Base Budget & Performance Budget.
जीरो आधारित बजट (Zero Base Budget) | प्रदर्शनोमुखी बजट (Performance Budget) |
जीरो आधारित बजट, बजट की एक ऐसी प्रक्रिया है, जो बीता हुआ कार्य एवं कल्पना आधारित गतिविधियों के आधार पर बजट का निर्माण नहीं करती है। | परफारमेंस बजट बजट की ऐसी प्रक्रिया है जो बीता हुआ कार्य एवं कल्पना पर आधारित होता है। |
शून्य आधारित बजट में भौतिक आउटपुट (Physical Output) का पहले मूल्यांकन किया जाता है और इसके बाद वित्तीय इनपुट की मांग की जाती है। | परफारमेंस बजट में वित्तीय इनपुट का अनुमान पहले लगाया जाता है एवं बाद में वास्तविक भौतिक आउटपुट के साथ संबंध स्थापित किया जाता है। |
राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) के लिए शून्य आधारित बजट लागू करने से पहले दो पूर्व आवश्यकताएं होती है (I)गतिविधियों (Activities) के लिए परफॉर्मेंस यूनिट की पहचान (ii) और गतिविधि आवधिक प्रकृति का होना चाहिए ताकि काम की मात्रा का आकलन किया जा सके। | परफारमेंस बजट सभी गतिविधियों पर लागू होता है जो प्रदर्शन इकाई (Performance unit) के लिए चिन्हित है। |
शून्य आधारित बजट गतिविधि (Activities)का आवश्यकता अनुसार क्रमबद्ध किया जाता है। | परफारमेंस बजट में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। |
शून्य आधारित बजट में ग्रास रूट लेवल पर उद्देश्य को संकलन किया जाता है। | परफॉर्मेंस बजट में मंडल स्तर पर संकलन किया जाता है। |
Friday, 4 June 2021
DRAFT PARA
DRAFT PARA
- लेखा परीक्षा की गतिविधियों के दौरान नोटिस में आने वाली जिस गंभीर अनियमितता को रेलवे लेखा-परीक्षा रिपोर्ट में शामिल करने के लिए मुख्य लेखा परीक्षक एक पैरा का प्रस्ताव करता है उसे "ड्राफ्ट पैरा" कहते हैं।
- मुख्य लेखा परीक्षक यह निश्चय करता है कि स्पेशल पत्र, ऑडिट नोट, निरीक्षण रिपोर्ट या प्राथमिक तथ्यात्मक विवरण आदि को लेखा परीक्षा रिपोर्ट में शामिल किए जाने के लिए एक ड्राफ्ट पैरा में बदलने की आवश्यकता है तो वह ड्राफ्ट पैरा तैयार करते हैं।
- ड्राफ्ट पैरा महाप्रबंधक के व्यक्तिगत पते पर साथ ही उसकी अग्रिम प्रतियां संबंधित पत्र व्यवहार के साथ रेलवे के प्रमुख वित्त सलाहकार, संबंधित विभागाध्यक्ष, नियंत्रक महालेखा परीक्षक (रेलवे )और कार्यकारी निदेशक लेखा- रेलवे बोर्ड को भेजा जाता है।
- ड्राफ्ट पैरा की प्राप्ति से 8 सप्ताह की अवधि के भीतर रेलवे बोर्ड के साथ विचार-विमर्श के बाद रेलवे प्रशासन को अंतिम उत्तर मुख्य लेखा परीक्षक को भिजवा देना चाहिए।
- रेल प्रशासन द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट उत्तर का रेलवे बोर्ड से अनुमोदन कराने के लिए महाप्रबंधक को ड्राफ्ट पैरा के प्रस्तावित उत्तर के साथ निम्नलिखित अतिरिक्त सूचना भी रेलवे बोर्ड को भेजनी चाहिए। (i) मामले का इतिहास एवं पत्राचार की प्रतियां। (ii) ड्राफ्ट पैरा पर वाक्य वार टिप्पणी।।(iii) जहां विषय-वस्तु पर कार्यवाही करने में विलंब हुआ उसका सारांश।(iv) ऐसे मामलों की भविष्य में पुनरावृति रोकने के लिए की गई कार्यवाही।। (v) अनुशासनिक पहलू जहां आवश्यक हो।
- रेल प्रशासन यदि कोई संशोधन करने का सुझाव देना चाहता है या वह कोई टिप्पणी अंतिम उत्तर देने के पूर्व मुख्य लेखा परीक्षक के विचार प्रस्तुत करना चाहता है तो उसे यह सब तय कर लेना चाहिए जिससे कि अंतिम उत्तर भेजने में 8 सप्ताह से अधिक विलंब ना हो।
- ड्राफ्ट पैरा को रेल प्रशासन द्वारा वित्त सलाहकार और मुख्य लेखाधिकारी से विधिवत विधिक्षा (duly vetted) कराकर मुख्य लेखा परीक्षक को देना चाहिए।
- ड्राफ्ट पैरा के उत्तर की प्राप्ति के बाद, उसको जांच कर भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (रेलवे) संपादित पैराग्राफ को रेलवे बोर्ड के पास एक निश्चित अवधि के भीतर, तथ्यों के सत्यापन और ऐसे मुद्दों पर यदि आवश्यक हो तो आगे स्पष्टीकरण के लिए भेजेगा। इसके बाद ही पैरा को रेलवे की वार्षिक लेखा परीक्षा रिपोर्ट में शामिल किया जाता है।
- रेलवे बोर्ड की संविदाओं, योजनाओं और मंजूरी से संबंध ड्राफ्ट पैरा सीधे रेलवे बोर्ड द्वारा प्राप्त किए जाएंगे और उनका निपटारा भी रेलवे बोर्ड करेगा।