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Tuesday, 24 August 2021

Letter of Credit

 

Letter of Credit 

  1. भारतीय रेल ने 01.04.2018 से सप्लायरों/ठेकेदारों के भुगतान के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है जिसे लेटर ऑफ क्रेडिट कहते हैं।
  2. यह सप्लाई/कार्य के सभी अनुबंधों के भुगतान के लिए लागू  है।
  3. सप्लाई/कार्य के अनुबंध के भुगतान में पारदर्शिता एवं व्यापार करने में आसानी हो इसके लिए भारतीय रेल द्वारा लेटर ऑफ क्रेडिट को अपनाया गया है।
  4. लेटर ऑफ क्रेडिट 10 लाख मूल्य से ऊपर के सभी टेंडर पर लागू है।
  5. टेंडर की शर्तों में ही लेटर ऑफ क्रेडिट के माध्यम से भुगतान की शर्त दिया जाएगा, जो ठेकेदार को विकल्प के तौर पर उपलब्ध होगा।
  6. लेटर ऑफ क्रेडिट के संचालन एवं जारी करने में आकस्मिक व्यय ठेकेदार द्वारा वहन किया जाएगा।
  7. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को लेटर ऑफ क्रेडिट के मूल्य एवं एल सी के नियम और शर्तों के आकलन के लिए अधिकृत किया गया है।
  8. जब ठेकेदार द्वारा बिल सबमिट किया जाएगा तो बिल को निर्धारित नियम के अनुसार जांच कर उस बिल के विरुद्ध डी ए (Document of Authorisation) जारी किया जाएगा।
  9. लेखा अधिकारी DA जारी करने के लिए उत्तरदायित्व हैं,वो ये भी सुनिश्चित करेंगे कि जो बिल ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत किया गया है वो डुप्लीकेट नहीं है एवं बिल IPAS (Integrated Pay Roll & Accounting System) एवं IREPS (Indian Railway E-Procurement System) के माध्यम से प्रस्तुत हुआ है।
  10. लेटर ऑफ क्रेडिट के लिए विक्रेता 0.15% व्यय वहन करेगा।

लेटर ऑफ क्रेडिट इस तरह कार्य करेगा।

  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया विक्रेता को LC जारी करेगा।
  • रेलवे कार्य/सप्लाई की समाप्ति पर DA ठेकेदार को जारी करेगा।
  • विक्रेता/ठेकेदार DA को अपने बैंकर के सामने भुगतान के लिए उपस्थित करेगा ।
  • बैंकर विक्रेता/ठेकेदार को भुगतान जारी करने के बाद DA को रेलवे के बैंकर SBI को भेजेगा।
  • रेलवे के बैंकर(SBI) हस्ताक्षर को सत्यापन करने के बाद, आपूर्तिकर्ता द्वारा जारी किए गए मूल DA और आपूर्तिकर्ता द्वारा जारी विनिमय बिल के विरुद्ध आपूर्तिकर्ता/ठेकेदार बैंक को प्रतिपूर्ति करेगा।

Wednesday, 18 August 2021

General Terms of Financial

 

General Terms of Financial


1. Gross earning (सकल आमदनी)

एक लेखा अवधि के दौरान हुए कुल कमाई को सकल आय (Gross earning) कहते हैं चाहे वह कमाई प्राप्त हुआ हो या नहीं।

               इस आय में कोचिंग आय,गुड्स आय और विविध आय शामिल हैं।कोचिंग आय को 'X' से सूचित किया जाता है, गुड्स आय को 'Y' से एवं विविध आय को 'Z' से सूचित किया जाता है।

2.Gross Receipts (सकल प्राप्तियां)

आमदनी जो वास्तव में एक लेखा अवधि के दौरान प्राप्त किया गया हो उसे सकल प्राप्तियां के रूप में जानी जाती है। इस प्राप्ति में भी कोचिंग आय, गुड्स आय और विविध आय शामिल है।

3.Net earning (शुद्ध आमदनी)

सकल आमदनी (Gross earning) एवं कार्य व्यय (working expenses) के बीच के अंतर को शुद्ध आमदनी कहते हैं। 
         इसमें सस्पेंस को जोड़ा नहीं जाता है, लेकिन कार्य व्यय (working expenses) में डीआरएफ एवं पेंशन फंड में हुए विनियोजन को जोड़ा जाता है।

4.Working Expenses (कार्य व्यय)

एक वित्तीय वर्ष में रेलवे के राजस्व में से रेलवे के कार्य के लिए किए गए कुल खर्च को कार्य व्यय कहते हैं । जोनल रेलवे द्वारा सामान्य कार्य के खर्चो (ordinary working expenses) में प्रशासन, संचालन और रखरखाव पर किए गए राजस्व व्यय शामिल रहता है। इसमें डिमांड नंबर 3 से 13 तक के सभी खर्चे शामिल रहते हैं । 
      कुल कार्य व्यय (total working expenses) में सामान्य कार्य व्यय (ordinary working expenses) के साथ डीआरएफ एवं पेंशन निधि में भी विनियोजित व्यय भी शामिल होता है।अर्थात मांग संख्या 3 से 14 तक शामिल होगा।

5.Capital outlay (पूंजीगत परिव्यय)

ठोस संपत्तियों को बढ़ाने के उद्देश्य से एक अवधि के दौरान किए गए पूंजीगत प्रकृति का व्यय जैसे संयंत्र और उपकरण, नई लाइनों का निर्माण, आवासीय भवन, कार्यशालाएं, शेड, बिजलीघर  को कैपिटल आउट ले कहते हैं ।

        दूसरे शब्दों में चालू वर्ष के दौरान सामान्य राजस्व से पूंजी खाते के तहत लिया गया अतिरिक्त भार पूंजीगत परिव्यय के रूप में जाना जाता है। वित्तीय वर्ष के अंत में यह राशि कैपिटल एट चार्ज में जोड़ दी जाती है।