भारत का लोक लेखा
- भारत का लोक लेखा यह भारत सरकार की एक निधि है,जिसका गठन अनुच्छेद266(2) के अंतर्गत किया गया है।
- इस निधि के अंतर्गत भारत सरकार एक बैंकर के रूप में कार्य कर रही है।अर्थात इस निधि में रकम जनता का है पर भारत सरकार के अधीन है।
- इस निधि के दो मुख्य भाग हैं (i) ऋण और जमा शीर्ष (ii) प्रेषण शीर्ष (Remittance Heads)
- पहला भाग का संबंध समेकित निधि से संबंध रखने वाले "ऋण शीर्षों" को छोड़कर अन्य ऋण के प्राप्तियों और भुगतान से संबंधित है।जिसमें धन की अदायगी की देयता भारत सरकार की होती है और भुगतान की गई राशियों की वसूली का अधिकार भी उसे होता है।जैसे अंशदायी और गैर अंशदायी प्रोविडेंट फण्ड,स्टाफ बेनिफिट फण्ड और रेलवे के फण्ड (DF,DRF ,etc.)
- दूसरे भाग का संबंध केवल समायोजन (Adjustment) शीर्षों से है ।जैसे विभिन्न लेखा शीर्षों के बीच अंतरण (जैसे कि पहले एक लेखा अधिकारी के खाते में दिखाए गए किन्तु अंतिम रूप से दूसरे के खातों में भेज दिया गया)
- भारत के लोक लेखा को एक इस उदाहरण से समझा जा सकता है जैसे NPS में जो रकम की कटौती हो रही है वो रकम अभी भारत सरकार के पास है पर वह जनता का है समय आने पर भुगतान करना होता है।उसी प्रकार पी एफ की कटौती ।