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Friday, 10 July 2020

National Railway Users Consultative Council


National Railway Users Consultative Council


राष्ट्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री परिषद


  • परिषद का गठन 1953 में किया गया था।
  • रेलवे उपयोगकर्ताओं को बेहतर प्रतिनिधित्व देने और रेलवे द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा से संबंधित मामलों पर विचार करने के उद्देश्य इस परिषद का गठन किया गया है।
  • ये परिषद तीन स्तर पर है
1.राष्ट्रीय स्तर -राष्ट्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री परिषद (National Railway Users Consultative Council (NRUCC)

2.क्षेत्रीय स्तर - क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (Zonal Railway Users Consultative Committee (ZRUCC)

3. मंडल स्तर - मंडल रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (Divisional Railway Users Consultative Committee (DRUCC)

कर्मचारियों के अनुशासन और नियुक्ति से संबंधित प्रश्न समितियों या परिषद के सामने नहीं लाने जाने चाहिए।


समिति की बैठकों या समिति के किसी भी अन्य कार्य में भाग लेने के लिए सभी गैर सरकारी सदस्यों को यात्रा और यात्रा भत्ता के लिए निशुल्क पास जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती है।

लक्ष्य-

I. रेलवे उपयोगकर्ता को बेहतर प्रतिनिधित्व।
II. सेवा से संबंधित मामलों पर रेलवे और उपयोगकर्ताओं के बीच परामर्श के लिए अधिक एवं लगातार अवसर देना।
III. यात्री सेवाओं में सुधार।

कार्य-

सुविधाओं का प्रावधान

नए स्टेशनों का उद्घाटन

यात्री सेवाएं एवं सुविधाओं में सुधार

सदस्य-

वाणिज्य मंडल, व्यापार संघ, उद्योग एसोसिएशन, कृषि संघ, विकलांग एसोसिएशन, पंजीकृत संघ, उपभोक्ता संरक्षण संगठन, विधायक, सांसद, रेलवे के अधिकारी आदि।

NRUCC-

अध्यक्ष-रेलमंत्री, सचिव-निदेशक यातायात वाणिज्यिक (सामान्य), कार्यकाल- 2 वर्ष, कार्यकाल शुरू-जुलाई से, मिलने का संख्या-2 बार।

ZRUCC-

अध्यक्ष-महाप्रबंधक, सचिव-जीएम के सचिव या जीएम द्वारा नामित अन्य अधिकारी, कार्यकाल- 2 वर्ष, कार्यकाल शुरू-अप्रैल से, मिलने का संख्या-3 बार।

DRUCC-

अध्यक्ष-डीआरएम, सचिव-Sr. Dom/Sr.Dcm, कार्यकाल- 2 वर्ष, कार्यकाल शुरू-जनवरी, मिलने का संख्या-3 बार से कम नहीं।


(2015GRP)

Thursday, 18 June 2020

Difference between Vetting and concurrence


Difference between Vetting and Concurrence.


वेटिंग:-

किसी भी स्टेटमेंट के आंकड़े (figures) की तथ्यात्मक शुद्धता की जांच को "वेटिंग" कहा जाता है।वेटिंग को दूसरे शब्दों में पुनरीक्षण या स्क्रूटिनी भी कहा जाता है। किसी भी प्रस्ताव की सावधानीपूर्वक और महत्वपूर्ण परीक्षण किया जाता है।उदाहरण के लिए वेटिंग ब्रीफिंग नोट्स,प्राक्कलन,खरीद आदेश आदि का किया जाता है।

Concurrence (कंकरेन्स)

कंकरेन्स अर्थात सहमति कार्यकारी अधिकारी द्वारा दिये गए प्रस्ताव जिसमें आँकड़े भी संदर्भित रहता है से वित्त विभाग की सहमति।
     यानी कोई भी प्रस्ताव पर सहमत होना ही कंकरेन्स है।उदाहरण के लिए नए पुलों का निर्माण,मशीनरी के प्रतिस्थापन आदि 

Monday, 15 June 2020

Reserve Bank Suspense

Reserve Bank Suspense (रिजर्व बैंक उचन्त)

  • लेखा संहिता I पैरा 436।
  • यह एक उचन्त शीर्ष है, जो रेलवे के अलावा अन्य लेखाधिकारी जैसे (पीएनटी, रक्षा )से आवक (inward) लेनदेन को समायोजित करने के लिए संचालित किया जाता है।
  • इस उचन्त शीर्ष में धन प्रेषण (Remittance into Bank) एवं चेक और बिल के लेनदेन के अलावा विभिन्न मदों सत्यापन और स्वीकृति के बाद लेखे के उपयुक्त शीर्ष "रिजर्व बैंक उचन्त" में डेबिट (प्राप्तियों के मामले में) क्रेडिट (भुगतान के मामले में) किया जाता है।
  • अन्य लेखाअधिकारियों द्वारा रिजर्व बैंक को सूचित किए गए लेन-देनों के समाशोधन (clearance) के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से समाशोधन ज्ञापन (clearance memo) मिल जाने पर इस उचन्त शीर्ष  को "रिजर्व बैंक डिपॉजिट" से contra डेबिट/ क्रेडिट करके सफाया (clear) कर दिया जाता।
  • इस उचन्त शीर्ष के तहत बकाया को वित्त वर्ष अर्थात 31 मार्च के अंत में शून्य कर देना चाहिए अगर किसी कारणवश फिर भी शेष बच जाता है तो अगर डेबिट शेष है तो MAR को तथा क्रेडिट शेष है तो डिपॉजिट मिसलेनियस में रखना चाहिए।


जनरल एंट्री इस प्रकार की जाएगी

(i) अन्य लेखाधिकारी से वाउचर और लेखा प्राप्त होने पर-


संबंधित राजस्व शीर्ष/सर्विस हेड आदि.....Dr./Cr.
 
To रिजर्व बैंक सस्पेन्स..................Cr./Dr.

(ii) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (नागपुर) से क्लियरेंस मेमो प्राप्त होने पर -

रिज़र्व बैंक सस्पेन्स ..................Dr./Cr.
To रिज़र्व बैंक डिपॉजिट (रेलवे)..Cr./Dr.

Thursday, 11 June 2020

iMMS


iMMS

फूल फॉर्म

Integrated Material Management System

  • शुरुआत में MMIS (Material Managment Information Systems) सबसे पहले 1998 में सेंट्रल रेलवे में शुरू किया गया था।
  • वर्तमान में iMMS को क्रिस द्वारा विकसित किया गया है जो एक केंद्रीयकृत प्रणाली है। 
  • इसके कार्यान्वयन से सामग्री की खरीद और आपूर्ति में पारदर्शिता आएगी ।
  • इसका उद्देश्य है रेलवे के सभी विभागों के यूजर डिपो को कंप्यूटरीकृत करना।
  • भारतीय रेलवे में iMMS परियोजना को दिसंबर 2019 से लागू करने की योजना है।

डिपो कंप्यूटरीकृत प्रणाली में निम्नलिखित विशेषताएं हैं:-

1. संबंधित Consignee एवम अधिकारी द्वारा उनके रोल के आधार पर केंद्रीकृत होस्टिंग किया जा सकता है।
2. इसके द्वारा ऑनलाइन लेनदेन जिसमें डेली ट्रांसजेक्शन रजिस्टर,लेजर का रखरखाव, इशू नोट, गेट पास आदि कार्य किया जाता है।
3. इस सिस्टम के माध्यम से स्टॉक इंडेन और नन-स्टॉक इंडेन जनरेट होगा।
4.डीपो के प्रोटोकॉल को मौजूदा रूप में डिजिटल सिस्टम के माध्यम से रखरखाव होगा।
5.iMMS/IREPS का एकीकरण।
6.डैशबोर्ड में प्रबंधन सूचना प्रणाली।

Tuesday, 9 June 2020

E-Recon


E-Recon

  • पूर्ण रूप-Electronic Reconciliation
  • यह एक ऑनलाइन स्थानांतरण लेनदेन(Transfer Transaction) वेब आधारित पोर्टल है जिसका शुरुआत 01.04 2011 को रेलवे में हुआ।
  • शुरुआत में यह स्वतंत्र पोर्टल के रूप में कार्य करता था अप्रैल 2019 से इसे IPAS मॉड्यूल पर लाया गया है।

उपयोगिता


  • इस पोर्टल के माध्यम से एक रेलवे के एक लेखा यूनिट से दूसरे लेखा यूनिट या एक रेलवे से दूसरे रेलवे के बीच लेखा का समायोजन एवं मिलान ऑनलाइन किया जाता है।
  • यह पोर्टल ऑनलाइन टीसी (Transfer Certificate) एक लेखा यूनिट से दूसरे लेखा यूनिट भेजना, उसे प्राप्त करना जेवी (जनरल वाउचर) बनाना और अपने लेखा को व्यवस्थित करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • अंतरण लेनदेन की दो कैटेगरी है कैश और समायोजन ।
  • कैश लेनदेन co7 के माध्यम से तैयार किया जाता है जबकि समायोजन लेनदेन जनरल वाउचर के माध्यम से तैयार किया जाता है।
  • जो भी नन कैश के आइटम होता है उसे इस पोर्टल पर टीसी बनाने के लिए सूचनाएं दर्ज करना होता है।
  • इसके लिए संबंधित डॉक्यूमेंट अपलोड किया जाता है टीसी बनाते समय समायोजन से संबंधित कॉलम को भरा जाता है जैसे कि कितने रकम की टीसी है कौन से यूनिट या रेलवे का है टीसी डेबिट है या क्रेडिट ।
  • उसके बाद टीसी जनरेट किया जाता है और स्वीकृति के लिए यूनिट को या दूसरे रेलवे का है तो मुख्यालय बुक्स के माध्यम से रेलवे को भेजा जाता है।
  • यूनिट/रेलवे टीसी को अवलोकन करने के पश्चात स्वीकृति प्रदान कर देता है यदि टीसी उस यूनिट से संबंधित नहीं है या उचित वाउचर संलग्न नहीं है तो टीसी को वापस कर दिया जाता है।
  • उदाहरण के लिए फ्यूल,पीएफ,पीओएच, जीएसटी,कॉस्ट ऑफ मटेरियल आदि का समायोजन इस माध्यम से किया जाता है।
 लाभ
1. इरकॉन के माध्यम से अंतरण लेनदेन तय समय पर संपन्न हो जाता है ।

2. इरकॉन से पहले लेखा का मिलान करने के लिए प्रत्येक तिमाही में कर्मचारियों/अधिकारियों के बीच मीटिंग होता था उसमें काफी समय व्यतीत होता था।

3. वाउचर तय समय पर संबंधित यूनिट को प्राप्त हो जाता है।

4. वाउचर लाने ले जाने लेखा का मिलान करने में कर्मचारियों पर जो टीए/डीए का व्यय होता था उसकी बचत।

Monday, 8 June 2020

CIPS


CIPS 

  • पूर्ण रूप -CIPS-Centralized Integrated Payment System (केंद्रीकृत एकीकृत भुगतान प्रणाली)
  • CIPS एक एकीकृत भुगतान प्रणाली है जिसके माध्यम से IPAS के जरिये ठेकेदार/कर्मचारी के बिल/वेतन आदि का भुगतान किया जाता है।
  • इसे CRIS (Centre for Railway Information Systems) ने विकसित किया है ।पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे COFMOW (Central Organization of Modernization of Works) में लागू किया गया जो सफल रहा पुनः इसे पूरे भारतीय रेलवे में लागू कर दिया गया है।
  • इसके लिए रेलवे का बैंकिंग पार्टनर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है।
  • इसके संयोजक उत्तर रेलवे है।
  • CIPS को IPAS से जोड़ा गया है।
  • इसके लिए प्रत्येक जोनल रेलवे चेक हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों को IPAS पर पंजीकृत कर सकता है , प्रत्येक अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को एक डिजिटल KEY  मिलेगा जिसे IPAS पर पंजीकृत करना होगा एवं उस चाबी को हस्ताक्षकर्ता  बैंक को एडवांस में शेयर कर सकता है।

CIPS के लाभ

  • चेक का डाटा IPAS से बैंक सर्वर में सीधे भेज दिया जाता है।
  • इससे फ्रॉड को रोका जा सकता है क्योंकि पहले के सिस्टम में चेक का डाटा IPAS से डाउनलोड कर बैंक सर्वर में अपलोड किया जाता था तो डाटा के साथ चालाकी किया जा सकता था किंतु CIPS में डाटा सीधे IPAS के सर्वर से ही बैंक के सर्वर में भेजा जाता है एवं डाटा को मॉडिफाइड नहीं जा सकता है सिर्फ देखा जा सकता है।

Sunday, 7 June 2020

IRPSM


IRPSM 


(i) IRPSM :-Indian Railways Projects Sanctions & Management.
(ii) यह एक वेब आधारित प्रोग्राम है जिसे CRIS (Center for Railway Information Systems) द्वारा विकसित किया गया है।
(iii) इस प्रोग्राम के दो व्यापक क्षेत्र है (i) नई परियोजनाओं की मंजूरी अर्थात वर्क्स प्रोग्राम (ii) ऐसे स्वीकृत परियोजनाओं का प्रबंधन और निगरानी।

IRPSM के उद्देश्य

  • जोनल रेलवे और उत्पादन यूनिटों द्वारा जो भी "नए वर्क्स प्रस्ताव" (New Works Proposal) है उसे ऑनलाइन तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजने की सुविधा प्रदान करता है।
  • "वर्क्स इन प्रोग्रेस" को संशोधन कर रेलवे बोर्ड भेजने की सुविधा प्रदान करता है।
  • जब कार्य रेलवे बोर्ड में स्वीकृत हो जाता है तो वर्क्स प्रोग्राम, पिंक बुक और अन्य स्वीकृत बुक को प्रिंटिंग की सुविधा प्रदान करता है।
  • इसके अतिरिक्त ऐसे सभी परियोजनाओं के प्रभावी प्रबंधन और निगरानी से जुड़ी सभी गतिविधियों को कार्यकारी अधिकारियों जैसे Sr.DOM,Sr.DEN के लिए मासिक अपडेशन की भी सुविधा प्रदान करता है।

IRPSM मंडल स्तर पर

  1. नए वर्क्स प्रस्तावों का निर्माण साथ ही कार्य का जस्टिफिकेशन (औचित्य) एवं सार लागत।
  2. वेटिंग के लिए वित्त विभाग  (Sr.DFM) को भेजना।
  3. डीआरएम द्वारा प्रस्ताव की मंजूरी (यदि DRM के पावर के तहत है तो)
  4. प्रस्ताव यदि डीआरएम के (शक्ति) पावर से ज्यादा है तो जोनल रेलवे को प्रस्ताव भेजना।
  5. डीआरएम के पावर के तहत स्वीकृत कार्यों को IRPSM  में इन प्रोग्रेस कार्य में जोड़ना।
  6. यूनिक प्रोजेक्ट आईडी असाइन करना।
  7. कार्यकारी एजेंसी द्वारा प्रत्येक कार्य के लिए स्थिति की रिपोर्टिंग करना।
  8. निर्माण कार्यक्रमों रिपोर्ट को जनरेट एवं प्रिंट करना।

IRPSM क्षेत्रीय स्तर पर 

  1. मंडलों से प्राप्त "नए कार्यों" प्रस्तावों का परीक्षण एवं प्रसंस्करण CPDE (Chief Planning & Designs Engineer) द्वारा किया जाएगा पुनः संबंधित जोनल प्लान हेड कोऑर्डिनेटर को अग्रेषित करना।
  2. नए कार्यों प्रस्तावों का निर्माण।
  3. वेटिंग के लिए वित्त (FA&CAO) को अग्रेषित करना।
  4. वेट किए गए प्रस्तावों को प्लान हेड कॉर्डिनेटर द्वारा जांच की जाएगी और फिर PCE (Principal Chief Engineer) के माध्यम से महाप्रबंधक को भेजी जाएगी।
  5. प्रस्ताव की स्वीकृति महाप्रबंधक द्वारा दी जाएगी यदि उनके शक्ति के तहत है तो।
  6. यदि प्रस्ताव महाप्रबंधक के शक्ति के तहत नहीं है तो प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड मंजूरी के लिए भेजी जाएगी।
  7. महाप्रबंधक के शक्तियों के तहत स्वीकृत सभी कार्यों को आईआरपीएसएम में इन प्रोग्रेस वर्क्स सूची में जोड़ना।
  8. एक आईडी असाइन करना।
  9. जोनल रेलवे मुख्यालय एवं मंडलों के लिए फंड की उपलब्धता एवं स्वीकृति की सीमा निर्धारित करना।
  10. संबंधित कार्यकारी एजेंसी द्वारा प्रत्येक कार्य के लिए हर महीने स्थिति की रिपोर्टिंग करना।
  11. वर्क्स। प्रोग्राम को जनरेट एवं प्रिंट करना (यदि आवश्यक है तो)।

IRPSM रेलवे बोर्ड स्तर पर


  1. क्षेत्रीय रेलवे से प्राप्त कार्य प्रस्ताव को EDCE(G) द्वारा संबंधित योजना प्रमुखों के नोडल निदेशालय को अग्रेषित करना।
  2. कार्यों का ऑनलाइन शॉर्टलिस्टेड सिफारिश और अग्रेषित करना  EDCE(G) को।
  3. 5 करोड़ से ज्यादा के कार्य प्रस्ताव को नोडल निदेशालय द्वारा वित्तीय सहमति के लिए EDF(X)-I & II को अग्रेषित करना।
  4. 5 करोड़ से नीचे वाले कार्यों को ऑनलाइन शॉर्टलिस्टिंग, सिफारिश एवं नोडल निदेशालय द्वारा संबंधित प्लान हेड्स  के AM (Additional Members) के मार्फत EDCE(G) को अग्रेषित करना।
  5. सभी चुने गए प्रस्तावों का संकलन (5 करोड़ से नीचे वाले कार्य) AM समिति की बैठक में EDCE(G) द्वारा।
  6. किसी भी समय ऑनलाइन येलो स्लीप अटैच किया जा सकता है एवं फाइल को परामर्श के लिए चलाया जा सकता है । सभी येलो स्लीप संचार को सामान्य रिकॉर्ड के लिए रखा जाएगा ऑफ द रिकॉर्ड प्रस्ताव पर परामर्श के प्रावधान के लिए।
  7. सभी शॉर्टलिस्टेड और अनुशंसित प्रस्तावों को ऑनलाइन सहमति और वित्त की टिप्पणी के साथ प्रत्येक प्लान हेडस के लिए नोडल निदेशालय द्वारा EDCE(G) के माध्यम से बोर्ड एवं माननीय रेल मंत्री के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
  8. यूनिक परियोजना आईडी असाइन किया जाएगा।

यूनिक परियोजना आईडी 14 डिजिट का होता है।

1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
जोनल रेलवे

मंडल

प्लान हेड्स

स्वीकृति वर्ष

स्वीकृति अधिकारी जैसे DRM, GM
कार्यकारी एजेंसी जैसे Sr. DEN आदि
क्रमांक संख्या


IRPSM के लाभ

  • सभी फाइल ऑनलाइन होने से पेपरलेस कार्य।
  • एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में फाइल जाने में समय की बचत, प्रस्ताव कुछ ही समय में ही बोर्ड कार्यालय पहुंच जाता है।
  • सभी जस्टिफिकेशन, प्लान, ड्रॉइंग, स्वीकृति प्रस्ताव के साथ अटैच।
  • सभी work-in-progress कार्य का ऑनलाइन मॉनिटरिंग।

Saturday, 6 June 2020

IR-WCMS

IR-WCMS (Indian Railways Works Contract Management System) भारतीय रेलवे अनुबंध प्रबंधन प्रणाली


  • यह वेब आधारित प्रोग्राम है जिसे CRIS द्वारा विकसित किया गया है जिसे IRCEP (Indian Railways Civil Engineering Portal) पर होस्ट किया गया है।
  • पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे भारतीय रेलवे के 17 मंडलों में शुरू किया गया था वर्तमान में इंजीनियरिंग विभाग के सभी कार्यों के लिए जो 01.05.2020 से शुरू होगा भारतीय रेलवे के सभी मंडलों पर लागू किया गया है।
  • ठेकेदारों को भुगतान करने के लिए IPAS के साथ एवं डेटा को लाने के लिए IREPS (Indian Railways Electronic Procurement System) के साथ IR-WCMS जुड़ा हुआ है।


कवर 

अनुबंध से जुड़ी सभी गतिविधियों जो परस्पर शामिल है निम्नलिखित है।
(i) परफॉर्मेंस गारंटी प्रस्तुत करना।
(ii) कांट्रैक्ट एग्रीमेंट को तैयार करना एवं हस्ताक्षर करना।
(iii) भुगतान के लिए आई पास के साथ बिलिंग और उसका एकीकरण।
(iv) नन-स्टॉक आइटम को तैयार करना एवं स्वीकृति देना।
(v) वेरिएशन स्टेटमेंट की तैयारी एवं मंजूरी।
(vi) DOC (Date of Completion) का विस्तार
(vii) PG/SD रिलीज करना
(viii) रेलवे और ठेकेदारों के बीच पत्राचार


           यह ई मॉड्यूल जोनल कॉन्ट्रैक्ट (क्षेत्रीय ठेकों) के लिए भी विकसित किया गया है।

IR-WCMS निम्नलिखित के लिए लागू नहीं है।

1.ठेकेदार के माप (contractor's measurements) के प्रावधान वाले अनुबंध।
2. कंपोजिट अनुबंध जिसमें इलेक्ट्रिक एवं एस & टी कार्य शामिल है।
3. ऐसे अनुबंध जिसमें ठेकेदारों को अग्रिम जारी करने का प्रावधान हो।

हालांकि उपरोक्त दिए गए मॉड्यूल भी डेवलप के तहत है और जल्द ही लॉन्च किए जाएंगे।

● IR-WCMS सिर्फ नए कार्य पर लागू है जो कार्य पहले से चल रहा है उसे मैनुअल रूप से ही चलाया जाएगा।


छूट :- डीआरएम के व्यक्तिगत अनुमोदन होने पर कारणों को दर्शाते हुए IR-WCMS से छूट दी जा सकती है।

● किसी भी परिस्थिति में कार्य अनुबंध IR-WCMS और मैन्युल दोनों पर हैंडल नहीं किया जा सकता है।

●निविदा समिति की कार्यवाही और LOA केवल IREPS के माध्यम से किया जाएगा बाद में इसे IR-WCMS पर इम्पोर्ट किया जा सकता है।


IRSDC

IRSDC 

पूर्ण रूप:-भारतीय रेलवे स्टेशन विकास निगम लिमिटेड (Indian Railways Station Development Corporation Ltd.)

  • एक SPV (Special  Purpose Vehicle),RLDA (Rail land Development Authority)रेल भूमि विकास प्राधिकरण और IRCON (Indian Railway Construction Company) का एक सयुंक्त उद्यम(Joint Venture) है।
  • यह कंपनी एक्ट 1956 के तहत 12 अप्रैल 2012 को स्थापित किया गया था।
  • IRSDC में RLDA और IRCON की इक्विटी हिस्सेदारी 50:50 के अनुपात में है।
  • वर्तमान में IRSDC की अधिकृत शेयर पूंजी 250 करोड़ रुपये है और भुगतान की गई शेयर पूंजी 51.60 करोड़ है।

कंपनी के मुख्य उद्देश्य 


  • वर्तमान/नए रेलवे स्टेशन को विकसित करना जिसमें स्टेशन निर्माण प्लेटफॉर्म की सतहों को बनाना, आदि के पुनःविकास  सहित नए निर्माण/नवीनीकरण द्वारा यात्री सुविधाओं के स्तर को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तरह विकसित करना शामिल है।
  • रेलवे सरकारी भूमि पर अचल संपत्ति के विकास के लिए परियोजनाएं शुरू करना और इसे वाणिज्यिक उपयोग में लाना यह स्टेशन के विकास में उपयोगी हो सकता है।
  • रेलवे संरचना के सभी कार्य जो रेलवे स्टेशन के विकास से जुड़े हैं उसे आगे बढ़ाना जिसमें BOT (Build-operate Transfer), BOOT (Build-Own-Operate Transfer), BLT (Build-lease Transfer) इत्यादि शामिल है।

Friday, 5 June 2020

Differences between PAC and RCC


Differences between PAC and RCC  


लोक लेखा समिति (PAC)
रेलवे अभिसमय समिति (RCC)
1.लोक लेखा समिति एक स्थाई संसदीय समिति है ।
1. यह एक अस्थायी संसदीय समिति है जो समय-समय पर लोकसभा द्वारा गठित कि जाती है।
2.लोक लेखा समिति में 22 सद्स्य होते हैं। (15 लोकसभा तथा 07 राज्यसभा)
2. रेलवे अभिसमय समिति में 18 सद्स्य होते हैं (12 लोकसभा तथा 6 राज्यसभा )
3. यह समिति केंद्र सरकार के सभी विभागों या मंत्रालयों के वित्त लेखों/ विनियोग लेखों की जाँच करती है ।
3.यह समिति सिर्फ रेलवे मंत्रालयों या भारतीय रेलों के भीतर वित्तीय मामलों में आवश्यक सुधार का सुझाव देती है ।
4. इस समिति के कार्य का दायरा बहुत व्यापक है ।
4. इस समिति के कार्य का दायरा रेलवे तक सीमित है।
5. यह समिति निम्न पर सिफारिश देती है ।
  (i) वित्त लेखा/विनियोग लेखों पर CAG कि वार्षिक रिपोर्ट की समी़क्षा कर इस पर सिफारिश देती है ।
(ii) भारत सरकार के वार्षिक लेखों की जाँच एवं समी़क्षा कर इस पर सिफारिश देती है ।
5. यह समिति निम्न पर सिफारिश देती है ।
(i) भारतीय रेलवे द्वारा भारत सरकार को दिये जाने वाले लाभांश की दर के संबंध में सिफारिश देना ।
(ii) सामान्य राज़स्व से DRF,DF, etc. में विनियोग के संबंध में सिफारिश देना।
(iii) रेलवे वित्तीय प्रशासन में लचीलापन तथा रेलवे लेखा एवम्‌ प्रबंधन में सुधार संबंधि सिफारिशें करती है।
6. लोक लेखा समिति की लगभग सभी सिफारिशें सरकार द्वारा क्रियान्वित की जाती है जो स्थाई  प्रकृति की होती है ।
6. रेलवे अभिसमय समिति की सिफारिशें सामान्यत: 5 वर्षों के लिए लागू की जाती है।

Tuesday, 2 June 2020

Differences between Government and Commercial Accounts


Differences between Government and Commercial Accounts.




सरकारी लेखा
वाणिज्यिक लेखा
01.सरकारी खातों का रखरखाव कैश के आधार पर किया जाता है । इसमें वित्तीय वर्ष के दौरान जो भी वास्तविक नकद प्राप्तियाँ और वास्तविक नकद भुगतान हुआ है उसका लेखा-जोखा रहता है।
01. वाणिज्यिक खातों का आधार Accrual (उपचित) है। इसका अर्थ यह हुआ कि अर्जित आय चाहे वह वास्तव में प्राप्त हुआ या नहीं,एवम्‌ देयताये जो देय है या नहीं ।
02.सरकारी खातों को तकनीकी रुप से वित्तीय खातों के रुप में जाना जाता है और रखरखाव सरकारी खाते के आवश्यकतानुसार किया जाता है। सरकारी खाते विभिन्न प्रमुख शीर्षों में वर्गीकृत कर प्रत्येक वर्ष संकलित किया जाता है तथा समेकित निधि का प्रतिनिधित्व करता है।
02. वाणिज्यिक खातों को तकनीकी रुप से “कैपिटल एवम्‌ राजस्व” खाता के रुप जाना जाता है । ये खाते रेलवे के वित्तीय उपक्रमों को वाणिज्यिक दॄष्टि से समी़क्षा करने में सुविधा प्रदान करता है। ये खाते भी रेलवे में हर वर्ष संकलित किया जाता है एवम्‌ रेलवे के वार्षिक रिपोर्ट में शामिल किया जाता है।
03. सरकारी खाते एकल प्रविष्टि प्रणाली पर आधारित है।
03. वाणिज्यिक खाते “दोहरे प्रविष्टि प्रणाली” पर आधारित है।
04. सरकारी लेखा में केवल आय और व्यय का खाता रखा जाता है।
04. वाणिज्यिक लेखा में व्यापार विनिर्माण, लाभ-हानि एवम्‌ तलपट तैयार किया जाता है ।
05. सरकारी खाते का डिजाइन इस प्रकार किया गया है कि कम से कम रकम टैक्सपेयर आम नागरिक से लिया जाए ताकि जनता के कल्याण एवम्‌ सुविधाऐं के लिए जो प्रोग्राम (योजना) चल रही है वो जारी रहे
05. वाणिज्यिक खाते का प्रारूप इस प्रकार से है कि ज्यादा से ज्यादा रकम प्रतिष्ठान के स्वामी के पास आये जिससे प्रतिष्ठान लाभ में रहे।

Monday, 1 June 2020

Out of Turn Works (OOT WORKS)

Out of Turn Works(OOT WORKS)


परिभाषा:-

ऐसे कार्य जो वर्तमान वर्ष के कार्य में शामिल किया जाता है, परंतु वह कार्य न तो वर्तमान वर्ष के कार्य में स्वीकृत रहता है एवं न तो पिछले वर्ष के स्वीकृत कार्यों में शामिल रहता है।
            दूसरे शब्दों में ऐसे कार्य जिन्हें बजट बनाते समय ऊंची प्राथमिकता नहीं दी जाती है और बजट में शामिल भी नहीं किया जाता है । किंतु यदि बाद में कार्यों को करवाने की आवश्यकता होती है तो उसे आउट ऑफ टर्न वर्क्स में शामिल किया जाता है।

कार्यान्वयन प्राधिकरण(Execution authority)

इस तरह के कार्यों को शुरू करने के लिए आवश्यक जस्टिफिकेशन देना चाहिए साथ ही यह भी बताना चाहिए कि इसे पिंक बुक/लॉ बुक में क्यों शामिल नहीं किया गया।

फण्ड- इस तरह के कार्य के लिए फंड की व्यवस्था उसी प्लान हेड के अंतर्गत पुनर्विनियोग  से किया जाएगा यानी जिस प्लान का OOT कार्य है।

  • CPDE-Chief Planning & Design Engg./CE/P&D-OOT कार्य के लिए नोडल अधिकारी होंगे (जोन में)
  • वित्तिय सहमति PFA/Sr.DFM से ली जाएगी जैसे भी कार्य हो,यानी मंडल स्तर पर Sr.DFM से एवम क्षेत्रीय स्तर पर PFA से ली जाएगी।
यात्री सुविधाओं वाले कार्य:-
(i) महत्वपूर्ण एवम टिकाऊ तथा स्थायी प्रकृति की सुविधाएं वाले कार्य को महत्व देना चाहिए।
(ii) फण्ड को फिनिशिंग वाले कार्य पर व्यय नहीं करना चाहिए।

सेफ्टी कार्य:-इस तरह के कार्य आठ महीनों में समाप्त हो जाना चाहिए।

* यातायात सुविधाओं वाले कार्य के लिए PCOM से मंजूरी लेनी चाहिए।

SOP

प्लान हेड्स
स्वीकृति शक्ति
Remarks

GM
DRM

5300-Passenger & other amenities.
2.5 cr. per case
2.5 cr. per case
वार्षिक लिमिट -25 cr नन सेफ्टी आइटम के लिए (सेफ्टी वर्क्स में यह लिमिट लागू नहीं है)
5200-staff amenities
1 cr. per case
NIL
अन्य प्लान हेड्स
2.5 cr. per case
Nil
M&P items
10 lakh per case
Nil
50 lakh (हालांकि LAW के तहत इस प्रकार के सभी कार्य PCME स्तर पर स्वीकृत होने चाहिए जो रेलवे बोर्ड द्वारा दिये गए अनुदान के भीतर हो)

Friday, 29 May 2020

Works Programme

Works Programme

निर्माण कार्यक्रम क्या है? यह कैसे संकलित किया जाता है?


परिभाषा:
इंजीनियरिंग संहिता अध्याय -VI
रेलों पर परिसंपत्तियों के सृजन(creation),अधिग्रहण (acquisition) और बदलाव (replacement) से संबंधित निवेश निर्णय तीन विभिन्न प्रोग्रामों के जरिए संसाधित किए जाते हैं।

(1) रोलिंग स्टॉक प्रोग्राम (प्लान हेड 21)
(2) मशीनरी एवं प्लांट प्रोग्राम (प्लान हेड 41)
(3) निर्माण कार्यक्रम (विभिन्न प्लान हेड के तहत)

वर्क्स प्रोग्राम के चार चरण है

(1) अग्रिम योजना के भाग के रूप में योजनाओं(स्कीमों) का निरूपण;
(2) बड़ी योजनाओं की छानबीन और स्वीकृति के लिए रेलवे बोर्ड को प्रस्तुत करना ताकि आगामी वर्ष में निष्पादित की जाने वाली परियोजनाओं का चयन किया जा सके;
(3) रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित वित्तीय सीमाओं के अंतर्गत प्रारंभिक निर्माण कार्यक्रम(PWP) तैयार करना और
(4) रेलवे बोर्ड के साथ विचार-विमर्श और अंतिम कार्यक्रम प्रस्तुत करना(FWP)

चरण प्रथम   (अग्रिम योजना)

  • किसी रेलवे का वार्षिक निर्माण कार्यक्रम तैयार करना उस वर्ष का कोई अलग-अलग कार्य नहीं होता है बल्कि मंडल अधिकारी के स्तर से लेकर रेलवे बोर्ड तक की एक अनवरत योजना प्रक्रिया का भाग होता है।
  • मंडल से होने वाले निवेश प्रस्ताव वह होते हैं जिनका उद्देश्य मंडल के ही भीतर परिचालन में सुधार या जमघट (बाधाओं)को समाप्त करना हो।
  • जिन बड़े निवेश प्रस्तावों से क्षेत्रीय रेल प्रणाली या सभी भारतीय रेलों को लाभ पहुंचता हो उन्हें रेल मुख्यालय के स्तर पर अथवा आवश्यक हो तो रेलवे बोर्ड के स्तर पर समन्वित और योजनाबद्ध किया जाना चाहिए।
  • नई लाइनों, आमान परिवर्तनों, दोहरी लाइन बिछाने और लाइन क्षमता से संबंधित अन्य निर्माण कार्यों के लिए जो 5 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले हो, विस्तृत यातायात और इंजीनियरी सर्वेक्षण किए जाने चाहिए।
  • नए मार्शलिंग यार्डों, माल टर्मिनलों और यातायात यार्डों आदि के प्रस्ताव के संबंध में, कार्य अध्ययन दलों को चाहिए कि अपेक्षित अतिरिक्त सुविधाओं के लिए स्कीमें बनाने से पहले वास्तविक कार्यप्रणाली का अध्ययन कर लें ।
  • रेट ऑफ रिटर्न 10% और उससे अधिक होना चाहिए।
  • जब किसी सामान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कई कार्य करने हो तो समग्र रूप से संपूर्ण योजना का वित्तीय फलितार्थ या औचित्य तैयार किए जाने चाहिए।
  • यदि किसी विस्तृत योजना में दो रेले शामिल हो, तो ऐसे मामले में रेलवे बोर्ड के विचारार्थ लागत का एक संयुक्त प्राक्कलन तैयार किया जाना चाहिए ।जिस रेलवे के क्षेत्र में कार्य का बड़ा भाग आता हो, उसे चाहिए कि लागत और वित्तीय फलितार्थ के संयुक्त आँकड़े रेलवे बोर्ड को प्रस्तुत करने के लिए, संलग्न  रेलवे से आंकड़े प्राप्त करें।

चरण द्वितीय (बड़ी योजनाओं की छानबीन)

  • 20 लाख रुपये या अधिक की लागत वाली सभी स्कीमें विस्तृत रूप से तैयार की जानी चाहिए और निम्नलिखित बातों के पूरे ब्यौरे सहित रेलवे बोर्ड को भेजी जानी चाहिए।
(i) तकनीकी विशेषताएं
(ii) ब्यौरेवार लागत
(iii) प्राप्त होने वाले संभावित लाभ
(iv) वित्तीय फलितार्थ
(v) प्रत्येक प्रस्ताव का मानचित्र
  • रेल प्रशासन को स्पष्ट रूप से प्रत्येक स्कीम का उल्लेख करना चाहिए और इस बात की पुष्टि करनी चाहिए कि प्रस्ताव द्वारा उद्देश्य की पूर्ण रूप से पूर्ति होती है और परियोजना का दायरा और लागत यथासंभव पूरे छानबीन के बाद तय किए गए हैं, जिसमें वित्तीय फलितार्थों का मूल्यांकन भी सम्मिलित है।
  • बोर्ड द्वारा योजनाओं की छानबीन हो जाने के पश्चात रेल प्रशासनों को बताया जाना चाहिए कि प्रस्तावों को निर्माण कार्यक्रम में सम्मिलित करने के लिए संशोधन पूर्वक या ज्यों का त्यों स्वीकार कर लिया गया है।
  • 20 लाख रुपये या इससे अधिक की लागत वाले रेल पर नवीनकरण के सभी प्रस्तावों में (i) यातायात का घनत्व (ii) ट्रैक की आयु (iii) रेलपथ संघटकों (components) की स्थिति होनी चाहिए। ये प्रारंभिक छानबीन रेलवे बोर्ड द्वारा रेल पथ सामग्री की उपलब्धता, पहले से स्वीकृत निर्माण कार्यों की प्रगति और अन्य तकनीकी बातों को ध्यान में रखकर की जाती है।

चरण तृतीय (प्रारंभिक निर्माण कार्यक्रम तैयार करना PWP)

  • इस बात को  सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी  प्रधानतः PCE (Principal chief engineer) रेलवे मुख्य इंजीनियर की होगी की विभिन्न विभागों द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव हर प्रकार से पूर्ण है और सही-सही तैयार किया गया है।
  • बोर्ड द्वारा बताई गई सीमाओं के भीतर समग्र प्राथमिकताएं भी उसी के द्वारा महाप्रबंधक और अन्य विभागाध्यक्षों के परामर्श से नियत की जाएगी। वह प्रारंभिक और अंतिम निर्माण कार्यक्रम को तैयार करने उसे समय पर प्रस्तुत करने के लिए जिम्मेदार होगा।
  • रेलवे बोर्ड को चाहिए कि प्रत्येक वर्ष लगभग जून/जुलाई में प्रत्येक रेलवे को सूचित कर दें कि प्रत्येक योजना शीर्ष के संबंध में कुल कितने परिव्यय के भीतर रेलवे द्वारा निर्माण कार्यक्रम तैयार किया जाए।
  • रेल द्वारा आगामी वर्ष का प्रारंभिक निर्माण कार्यक्रम रेलवे बोर्ड को सितंबर के प्रथम सप्ताह तक या बोर्ड ने उससे पहले की कोई तारीख निर्धारित की हो तो उस तारीख तक प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिए। प्रत्येक निर्माण कार्य का समुचित वित्तिय मूल्यांकन प्रमुख वित्त सलाहकार की टिप्पणियों सहित प्रारंभिक कार्यक्रम में दिया जाना चाहिए।
  • चालू निर्माण कार्यों (works in progress) को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • परियोजना लागत ,मात्रा और चालू कीमत दरों की दृष्टि से पक्के आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए और यदि परियोजना की प्रारंभिक तैयारी और निर्माण कार्यक्रम में इसको सम्मिलित किए जाने के समय के बीच की अवधि में कीमतों में कोई वृद्धि होती है तो माल-भाड़ा और किराए में वृद्धि के अतिरिक्त मजदूरी के और सामग्री के मूल्यों में हुए परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए प्राक्कलन को अपडेट किया जाना चाहिए।
  • किसी भी अन्य वृद्धि, जैसे परियोजना के दायरे में परिवर्तन के कारण होने वाली वृद्धि की अनुमति पूर्व कारण प्रस्तुत करके रेलवे बोर्ड की स्वीकृति लिए बिना नहीं दी जाएगी।
  • प्रत्येक निवेश प्रस्ताव के साथ एक विस्तृत प्लान संलग्न होना चाहिए जिसमें यातायात की आवश्यकताओं  के अनुरूप परियोजना का कार्यक्रम दिखाया गया हो तथा वर्ष के लिए प्रस्तावित वित्तीय परिव्यय इस परियोजना कार्यक्रम के अनुसार होना चाहिए, जिससे कि रेलवे बोर्ड कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए वस्तुतः धन की नियतन की व्यवस्था कर सके।

चरण चतुर्थ (अंतिम निर्माण कार्यक्रम FWP)


  • पृथक पृथक रेलों के कार्यक्रमों की जांच करने और महाप्रबंधकों के साथ विचार विमर्श करने के पश्चात रेलवे बोर्ड उन निर्माण कार्यों का विनिश्चय करेगा कि आगामी वर्ष के दौरान हाथ में लिए जाने चाहिए और और जो अंतिम निर्माण कार्यक्रम में शामिल किए जाने चाहिए।
  • क्षेत्रीय रेलवे रेलवे बोर्ड के विनिश्चय के परिणाम स्वरूप अपने निर्माण कार्यक्रमों को अशोधित करेंगे और रेलवे बोर्ड को अपना अंतिम निर्माण कार्यक्रम अनुबंधित तारीख तक भेजेंगे।
  • मांग सकल व्यय (Gross Expenditure) के लिए होगी और जमा और वसूलियों (credits and recoveries ) मांगों को फुटनोट के रूप में दिखाई जाएगी।





Thursday, 28 May 2020

Differences between Operating Ratio and Performance Efficiency Index


Differences between Operating Ratio and Performance Efficiency Index.

Operating Ratio (O.R) परिचालन अनुपात
Performance Efficiency Index (PEI) प्रदर्शन दक्षता सूचकांक
1.परिचालन अनुपात में माँग संख्या 03 से 13 तक के व्यय को शामिल किया जाता है ।
1.PEI में माँग संख्या 03 से 12 तक के व्यय को शामिल किया जाता है।
2.ये विभाजित आय (Apportioned) के लिए प्रयुक्त होता है।
2. ये उत्पन्न आय (Originating) के लिए प्रयुक्त होता है।
3. इसमें DRF एवम्‌ पेंशन में विनियोग भी शामिल होता है ।
3. इसमें DRF एवम्‌ पेंशन में विनियोग भी शामिल नहीं होता है ।
4. इसकी गणना जोनल स्तर पर होता है ।
4. इसकी गणना मंडल स्तर पर होता है ।
5. इसके निकालने के सूत्र है :
Gross Working Expenses   X 100
Gross Earning                  

5. इसके निकालने के सूत्र है :
Demands 03 to 12   X 100
Originating Earning

GWE= OWE+Appropriation to DRF & Pension Fund

OWE= 03 to 13 demands expenditure

(2016 WO, 2017-18 Books & Budget)