Material Modification (महत्वपूर्ण आशोधन) पैरा 1109-1113 ई एवं ACS-59
महत्वपूर्ण आशोधन किसी कार्य या योजना के प्रकृति में परिवर्तन करने का प्रतिनिधित्व करता है जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत होता है।
किसी स्वीकृत निर्माण कार्य अथवा योजना में, प्राक्कलन को स्वीकृति देने वाले प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन के बिना ,किसी महत्वपूर्ण आशोधन की ना तो अनुमति दी जानी चाहिए और ना किया जाना चाहिए।
एडवांस करेक्शन स्लिप 59 E के तहत निम्नलिखित मैटेरियल मोडिफिकेशन नहीं होगा।
(अ) रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नीति के कारण उत्पन्न होने वाले निम्लिखित कार्यों के विनिर्देशों या मानको में परिवर्तन-
(I) कंस्ट्रक्शन
(II) इंटरलॉकिंग
(III) इलेक्ट्रिफिकेशन
(IV)ट्रैक्शन
(V) SOD आवश्यकता
(ब) स्वीकृत यार्ड वर्क के कार्य को पूरा करने के दौरान कार्य को पूरा करने के लिए माइनर मोडिफिकेशन।
(स) वैधानिक/नियामक आवश्यकताओं के परिणामस्वरूप होने वाले संशोधन।
(द) निर्माण में मितव्ययता लाने और परियोजना की समय पर डिलीवरी के लिए संशोधन।
(ई) परियोजना को पूरा करने के लिए आवश्यक कोई भी कार्य।
* निम्नलिखित को मैटेरियल मोडिफिकेशन के रूप में माना जाएगा:-
कोई भी कार्य जो स्वयं स्वतंत्र कार्य है, लेकिन अनिवार्य रूप से मौजूदा कार्य के साथ किया जाना आवश्यक है, उसे मौजूदा कार्य में मैटेरियल मोडिफिकेशन के रूप में माना जाएगा, बशर्ते कि यह मौजूदा कार्य के साथ सीधे जुड़ा हो। इसकी मंजूरी बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी शक्तियों के प्रत्यायोजन के अनुसार होगी।
*रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत परियोजना जो महत्वपूर्ण आशोधन से भिन्न हो किसी आशोधन की मंजूरी महाप्रबंधक या किसी निम्नतम प्राधिकारी द्वारा दी जा सकती है बशर्ते की आशोधन के लिए किसी अतिरिक्त व्यय की आवश्यकता पड़ती है तो वह रकम उसकी स्वीकृति की शक्तियों से अधिक ना हो जाए।
महत्वपूर्ण आशोधन की स्वीकृति:
यदि रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत किसी परियोजना में , यदि निर्माण कार्य के वस्तुतः प्रारंभ होने के पूर्व किसी महत्वपूर्ण आशोधन को शामिल करना आवश्यक हो जाता है तो परियोजना का एक संशोधित संक्षिप्त प्राक्कलन तैयार करके रेलवे रोड के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। जब रेलवे बोर्ड अथवा उससे ऊंचे प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत किसी परियोजना में , निर्माण कार्य की प्रकृति के दौरान , किसी महत्वपूर्ण आशोधन को शामिल करना आवश्यक हो जाए तब तक संशोधित संक्षिप्त प्राक्कलन रेलवे बोर्ड को प्रस्तुत किया जाना चाहिए भले ही उसके फलस्वरूप स्वीकृत प्राक्कलन की राशि में कोई आधिक्य होने की संभावना ना भी हो। जब तक प्रस्तावित आशोधन को रेलवे बोर्ड का अनुमोदन प्राप्त ना हो जाए तब तक उस आशोधन पर ना तो कोई देयता उपगत की जानी चाहिए और ना ही बचत को , यदि इसके शामिल किए जाने में बचत होने की संभावना हो ,किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए।
कोई ऐसा आशोधन जो विशुद्ध इंजीनियरिंग कारणों से आवश्यक हो और व्यय ₹10000 से कम हो तो कार्यपालक इंजीनियरों को साधारणतः ऐसे आशोधन के प्रस्ताव को उच्चतर प्राधिकारी को भेजने की जरूरत नहीं है।
(2010WO,2016WO,2017-18W)