1.भारतीय रेलवे में प्रमुख कार्य/परियोजनाओं (Major Works/Projects) के प्रत्येक अनुमान (each estimate)में, कार्य/परियोजना के निष्पादन के लिए लगे कर्मचारियों और कार्यालय व्यय की लागत को कवर करने के लिए "सामान्य प्रभार" शुल्क का प्रावधान है।
2.ये सामान्यतः उस प्रकार के प्रभार है जो नई लाइन शुरू होने से पहले होता है।यह खर्चे मुख्यतया दो भागों में बांटे गए हैं (i) सामान्य प्रभार-स्थापना (ii) सामान्य प्रभार-स्थापना से भिन्न।
3.प्रथम के अंर्तगत निर्देश और सामान्य लेखा परीक्षा और लेखे, सिविल इंजीनियरिंग, बिजली विभाग, आदि की स्थापना का खर्च जो उस कार्य पर प्रभृत है, शामिल किया जाता है।
4.द्वितीय के अंतर्गत संयंत्र निर्माण, उपकरण, कार्यालय व्यय,अस्थायी रिहायशी क्वार्टर, भण्डार व सामान्य प्रभार, नकदी/भंडार की हानी आदि और लाईन खोलने से पूर्व परिचालन व्यय आते हैं।
2.ये सामान्यतः उस प्रकार के प्रभार है जो नई लाइन शुरू होने से पहले होता है।यह खर्चे मुख्यतया दो भागों में बांटे गए हैं (i) सामान्य प्रभार-स्थापना (ii) सामान्य प्रभार-स्थापना से भिन्न।
3.प्रथम के अंर्तगत निर्देश और सामान्य लेखा परीक्षा और लेखे, सिविल इंजीनियरिंग, बिजली विभाग, आदि की स्थापना का खर्च जो उस कार्य पर प्रभृत है, शामिल किया जाता है।
4.द्वितीय के अंतर्गत संयंत्र निर्माण, उपकरण, कार्यालय व्यय,अस्थायी रिहायशी क्वार्टर, भण्डार व सामान्य प्रभार, नकदी/भंडार की हानी आदि और लाईन खोलने से पूर्व परिचालन व्यय आते हैं।
5.यह व्यय साधारण तौर पर प्राक्कलन में अन्य मदों पर खर्च के कुछ प्रतिशत के आधार पर लगाये जाते हैं।यह निक्षेप कार्य (deposit works) पर भी लागू होता है।परंतु निक्षेप कार्य पर इनको लगाते समय अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता होती है।क्योंकि इनमें कमी-बेशी से व्यर्थ की आलोचना होती है, इसलिए ऐसे कार्यों पर सामान्य प्रभार का अनुमान,पिछले अनुभव के आधार पर करना चाहिए।यह खर्चे विभागीय प्रभार(departmental charges) से पूर्णतया भिन्न है।