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Sunday, 19 July 2020

Schedule of Power

Schedule of Power


परिभाषा-

रेल प्रशासन सुचारू रूप से चले इसके लिए रेलवे बोर्ड महाप्रबंधक को शक्ति प्रदान करते हैं,इसे ही "शिड्यूल ऑफ पावर" कहते हैं।
          इन शक्तियों को महाप्रबंधक प्रमुख वित्त सलाहकार के परामर्श से अपने अधीनस्थ अधिकारियों में वितरित कर देते हैं।

उद्देश्य-

शिड्यूल ऑफ पावर का प्रमुख उद्देश्य है कि किसी भी कार्य पर अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा त्वरित निर्णय लेना एवं शक्तियों का विकेंद्रीकरण।

        शिड्यूल ऑफ पावर का प्रयोग प्राधिकार द्वारा निर्धारित अधिकार एवं निर्धारित सीमा तक ही किया जाता है। यह अधिकार मौजूदा कोडल प्रक्रियाओं,नियमों एवं रेलवे बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी किए गए पत्रों पर आधारित होता है। साथ ही यह शक्तियां फण्ड की उपलब्धता पर भी निर्भर है।बिना महाप्रबंधक के अनुमोदन से कोई शक्तियों का पुनः प्रत्यायोजन नहीं किया जा सकता है।

महाप्रबंधक शक्तियों का वितरण तीन शीर्षकों के तहत वर्गीकृत करते हैं।
I-PHODs/HODs
II-Field units DRM/ADRM/SAG
III-Divisional/Extra Divisional Officers and Officers in Headquarter.


शिड्यूल ऑफ पावर को कई भागों में बंटा गया है-

(i) कार्यों से संबंधित मामलों
(ii) वाणिज्यिक मामलों
(iii)स्टोर के मामले
(iv)स्थापन मामले
(v) मेडिकल मामले
(vi) विविध मामले


कुछ शक्तियां ऐसी है कि महाप्रबंधक अपने अधीनस्थ अधिकारियों को वितरित नहीं करते हैं, उसे महाप्रबंधक के नकारात्मक शक्ति के रूप में जाना जाता है।जिसके लिए उच्च अधिकारी या रेलवे बोर्ड से परामर्श लिया जाता है।

Wednesday, 10 June 2020

IPAS/AIMS

IPAS/AIMS


Full Form
IPAS-Integrated Payroll & Accounting System.
AIMS-Accounting Information Management System.

  • IPAS एक ऑनलाइन पोर्टल है जिसे CRIS द्वारा विकसित किया गया है।
  • यह सभी रेलवे के लिए एक कॉमन एप्लीकेशन है जो सभी रेलवे के लेखांकन कार्य के लिए केंद्रीय कृत मंच प्रदान करता है।
  • प्रबंधन और एकीकरण के कार्यों में इस तरह के केंद्रीयकरण से काफी लाभ है।
  • IPAS पे रोल प्रोसेसिंग और वित्तीय कार्यों को स्वचालित (automatic) करने की एक प्रणाली है।
  • IPAS मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा है।
     (i) पर्सनल मॉड्यूल    (ii) वित्तीय मॉड्यूल
  • पर्सनल मॉड्यूल में शामिल है जैसे पेरोल प्रोसेसिंग,लीव, लोन ,टीए, इनकम टैक्स, क्वार्टर एवं बिजली आदि।
  • वित्तीय मॉड्यूल में शामिल है जैसे आंतरिक जांच, बुक्स, पीएफ, पेंशन, बजट ,सस्पेंस आदि।


लाभ

  1. केंद्रीय पे रोल और लेखा प्रणाली।
  2. वेब आधारित।
  3. तीन स्तरीय स्थापना।
  4. वास्तविक समय में जानकारी।
  5. वेब का केंद्रीय कृत रखरखाव और प्रबंधन में परिवर्तन।
  6. एकरूप प्रक्रियाएं/रिपोर्टस।
  7. बोर्ड द्वारा जारी नियमों/परिपत्रों का त्वरित अनुपालन।
  8. अन्य सभी केंद्रीय कृत एप्लीकेशन/वेब जैसे PRS,FOIS,MMIS,CMS,TMS आदि से लिंक
  9. आपदा रिकवरी का प्रावधान।



Friday, 8 May 2020

Negotiation


Negotiation (समझौता वार्ता)

  1. किसी समझौते पर पहुंचने के उद्देश्य से किए गए विचार-विमर्श को "निगोशिएशन" कहा जाता है।
  2. भारतीय रेलवे के वर्क्स टेंडर में बातचीत के द्वारा ठेकेदार का चयन नियम के बजाय एक अपवाद स्वरूप है, और इसका उपयोग तब किया जा सकता है जब सभी निविदाओं का मूल्य यथोचित रूप से उच्च माना जाता है और यह माना जाता है कि पुनः निविदा बुलाना रेलवे को बेहतर लाभ नहीं पहुंचा सकता है।
  3. सामान्य तौर पर एल-1 जो सबसे कम, वैद्य, योग्य और तकनीकी रूप से स्वीकार्य ठेकेदार हैं ,उसके साथ अनुबंध किया जाएगा यदि दरें अनुचित रूप से अधिक नहीं हो।
  4. यदि दरें अनुचित रूप से उच्च थी तो यह निर्णय लिया जाएगा कि पुनः निविदा आमंत्रित करना है या एल-1 के साथ बातचीत करना चाहिए ,इसका निर्धारण निविदा समिति की सिफारिश के आधार पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाना चाहिए।
  5. सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित ठेकेदार के साथ वार्ता के लिए निर्णय लेने के बाद निम्नलिखित प्रक्रियाओं को अपनाया जाना चाहिए।
(I) L-1 के अलावा अन्य निविदाकारों के साथ बातचीत की अनुमति नहीं है।
(II) आगे L-1 द्वारा मूल रूप से उद्धृत दरें, बातचीत की विफलता की स्थिति में, स्वीकृति के लिए खुली रहेगी।
(III) निविदाकारों के साथ बातचीत करने और संशोधित दर प्राप्त करने और स्वीकृति के उसी की सिफारिश करते हुए, निविदा समिति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रेलवे के वित्तीय हितों की सुरक्षा की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरी तरह देखा गया है।


नोट:- उपरोक्त निर्देशों को विशेष कार्यों या उपकरणों के लिए निविदा पर सख्ती से लागू नहीं किया जा सकता है, जहां ठेकेदार अपनी विशिष्टताओं औऱ डिजाइनों  के अनुसार विभिन्न कारणों जैसे कि प्रौद्योगिकी में सुधार आदि के लिए बोली लगा सकते हैं और उनके साथ तकनीकी और अन्य विवरणों पर चर्चा किया जा सकता है ।वार्ता की प्रक्रिया FA&CAO  के परामर्श से प्रत्येक मामलों के गुणों पर तय की जानी चाहिए।



(2012W,2015W Exp.)

Saturday, 2 May 2020

Surveys

सर्वेक्षण (Surveys)

  1. रेलवे नई लाइन, गेज परिवर्तन, दोहरीकरण एवं अन्य यातायात सुविधाओं को विकसित करने से पहले विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण करते हैं।
  2. इस सर्वेक्षण में भौगोलिक क्षेत्र की जांच, उस क्षेत्र के बारे में जानकारी इकट्ठा करना एवं उस क्षेत्र के विवरण का रिकॉर्ड किया जाता है।
  3. ये विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण निम्नलिखित है 
  4. (i)यातायात सर्वेक्षण (Traffic Survey)
         (ii)टोह सर्वेक्षण (Reconnaissance  Survey)
         (iii)प्राथमिक सर्वेक्षण (Preliminary Survey)
         (iv)अंतिम स्थान सर्वेक्षण (Final location Survey)

(i) यातायात सर्वेक्षण :

यातायात सर्वेक्षण यह एक विस्तृत अध्ययन है जो इसलिए किया जाता है कि नई लाइनों के मामले में यातायात की संभावनाओं की भविष्यवाणी की जा सके ताकि सर्वाधिक आशाजनक मार्ग के प्रोजेक्शन में सुविधा हो तथा बनाई जाने वाली लाइन की कोटी निर्धारित की जा सके। साथ ही इसलिए भी कि मौजूदा लाइन पर यातायात की मात्रा का आकलन किया जा सके और यह निर्धारित किया जा सके कि उस लाइन पर कौन-कौन सी यातायात सुविधाएं देनी होगी। यह सर्वेक्षण टोह या प्रारंभिक इंजीनियरी सर्वेक्षणों के साथ साथ किए जाएंगे ताकि सिफारिशें बनाते समय वैकल्पिक प्रस्तावों की तकनीकी व्यवहारिकता तथा लागत को ध्यान में रखा जा सके।


यातायात सर्वेक्षण किसी क्षेत्र या खंड की यातायात संबंधी परिस्थितियों के विस्तृत अध्ययन का नाम है, जो नई लाइन परियोजनाओं, फिर से बिछाए जाने वाली लाइनों ,अमान परिवर्तन योजनाओं ,दोहरी लाइन बिछाने के कार्यों या लाइन की क्षमता से संबंधित अन्य बड़े कार्यों की यातायात संभाव्यता और वित्तीय फलितार्थों का आकलन के लिए किया जाता है।

किसी परियोजना के आर्थिक अध्ययन के बाद ही इस नई परियोजित रेलवे लाइनों या अमान परिवर्तन आदि के बारे में निर्णय लिया जा सकता है। यातायात सर्वेक्षण में यह आकलन करने की कोशिश की जाती है कि पूर्व कल्पनीय भविष्य में कुल कितना यातायात पैदा होने की संभावना है और यह आकलन केचमेंट एरिया तथा रेल और सड़क के बीच कुल यातायात के विभाजन के विशेष संदर्भ में किया जाता है।

अर्जन और संचालन व्यय की संगणना परियोजना के आर्थिक जीवन जोकि 30 वर्ष माना जा सकता है के प्रत्येक वर्ष के लिए की जानी चाहिए ,ताकि वार्षिक नकदी प्रवाह तकनीक (DCF Technique) लागू करते हुए परियोजना का मूल्यांकन करके यह देखा जा सके कि क्या इससे 10% का न्यूनतम स्वीकार्य प्रतिफल मिल जाएगा।

यातायात (वाणिज्य या परिचालन) विभाग के किसी अनुभवी प्रशासी अधिकारी को यातायात सर्वेक्षण का काम नियमतः सौंपा जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए की प्रत्याशित यातायात ,पूंजी लागत और आवर्ती खर्चे (Recurring expenses)  के प्राक्कलन वास्तविक है और परियोजना का वित्तीय मूल्यांकन , प्रत्येक चरण पर निवेश और प्रतिफल के फेजिंग सहित ,यथासंभव सही-सही और काफी वस्तु निष्ठा के साथ किया जाए ,उपयुक्त हैसियत प्रवर वेतनमान (Senior-scale) या प्रशासी ग्रेड (Administration Grade) के किसी लेखा अधिकारी को, जिसे यातायात लागत निर्धारण का अनुभव हो, शुरू से ही यातायात सर्वेक्षणअधिकारी के साथ सहयोजित कर देना चाहिए और वह सर्वेक्षण दल के साथ मिलकर काम करेगा। परियोजना के इंजीनियरी सर्वेक्षणों के इंचार्ज मुख्य इंजीनियर परियोजना के यातायात सर्वेक्षण के समग्र इंचार्ज भी होंगे और यातायात सर्वेक्षण की रिपोर्ट उनके सामान्य मार्ग निर्देशन में तैयार की जाएगी ताकि सुनिश्चित हो सके सबसे अधिक किफायती प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। रेल प्रशासन द्वारा यातायात सर्वेक्षण दल को जो  विचारार्थ विषय सौंपे जाए उनमें यह हिदायत भी दी जाए की किस किस्म के अन्वेषण किए जाएंगे और उनका दायरा क्या होगा। यातायात सर्वेक्षण दल को भी चाहिए कि फील्ड में कार्य होते समय और अवकाश की अवधि में भी समय-समय पर मुख्यालय जाते रहे ताकि वे महाप्रबंधक से और अन्य प्रधान अधिकारियों से परामर्श कर सके और आवश्यकता होने पर मूल विचारार्थ विषयों ,समर्थ प्राधिकारी से अशोधित कर सके। यह इसलिए आवश्यक है कि मुख्य लाइन प्रशासन अन्वेषणअधीन नई लाइन आदि के अभिकल्प निर्धारित कर सकें।

(ii)टोह सर्वेक्षण (Reconnaissance Survey)


"टोह" शब्द का अर्थ है किसी क्षेत्र के ऐसे सभी रफ और रैपिड इन्वेस्टिगेशन (स्थूल और द्रुत अन्वेषण)जो किसी परियोजित रेलवे लाइन के एक अथवा अधिक मार्गों की तकनीकी व्यवहारिकता तथा अनुमानित लागत (approximate cost) मालूम करने के लिए किए जाए। ये अन्वेषण, फील्ड में अधिक सावधानीपूर्वक अन्वेषण किये बिना, भारतीय सर्वेक्षण विभाग के कंटूर मानचित्रों और अन्य उपलब्ध सामग्री की सहायता से की जानेवाली साधारण जांच के आधार पर किये जाते हैं और उनमें केवल ऐसे उपकरणों का उपयोग किया जाता है जिनसे अनुमानित दूरियां तथा ऊंचाइयों द्रुत गति से मालूम किया जा सके।

इस सर्वेक्षण में निम्नलिखित जानकारी एकत्रित की जाती है।

(i) हिल्स घाटियों में  पानी का क्षेत्र, जलवायु द्वीप आदि जैसे क्षेत्रों की विशेषताएं।
(ii) मिट्टी की प्रकृति
(iii) क्षेत्र में नदियों की धारा ,उनकी अनुमानित चौड़ाई ,गहराई आदि
(iv) पहाड़ियों एवं झीलों की स्थिति

इस सर्वेक्षण में बैरोमीटर, प्रिजमेटिक कम्पास, द्वीपदीय दूरबीन पेडोमीटर उपकरण की आवश्यकता होती है।

जहां उपयुक्त आकाशी फोटोग्राफ उपलब्ध हो वहां यथा अपेक्षित उपकरणों द्वारा क्षेत्र अन्वेषण से फोटोग्राफी के त्रिविमीय अध्ययनों और स्थल निरीक्षणों से  पर्याप्त रूप से बचा जा सकता है उन्हें छोड़ा जा सकता हैं।

(iii) प्रारंभिक सर्वेक्षण (Preliminary Survey)

इस सर्वेक्षण में उस मार्ग अथवा उन मार्गों की विस्तृत उपकरणनिय जांच की जाती है जो "टोह सर्वेक्षण" के परिणाम स्वरूप चुने गए हो ताकि इस सर्वेक्षण के अधीन परियोजित लाइन की निकटतम संभावित लागत का अनुमान लगाया जा सके। यातायात सर्वेक्षण के साथ इस सर्वेक्षण पर विचार करके जो परिणाम निकले सामान्यतः उसी से यह निश्चय किया जाएगा की लाइन बनाई जाए अथवा नहीं। किंतु निर्माण प्रारंभ करने से पूर्व रेलवे बोर्ड अंतिम मार्ग निर्धारण सर्वेक्षण पर आधारित प्राक्कलन की मांग कर सकता है । प्रारंभिक सर्वेक्षण अधिक परिशुद्धता के साथ किया जाना चाहिए क्योंकि अंतिम मार्ग के संरेखण इस पर निर्भर करता है।

(iv)अंतिम स्थान-निर्धारण सर्वेक्षण (Final location survey)


अंतिम मार्ग निर्धारित सर्वेक्षण, सामान्यतः ये क्रम में नहीं होता है। इसे अंतिम रूप से रेलवे बोर्ड द्वारा तय किया जाता है कि लाइन का निर्माण होगा अथवा नहीं तब ये सर्वेक्षण किया जाता है ।अंतिम मार्ग निर्धारण में अपेक्षित कार्य तथा प्रारंभिक सर्वेक्षण में अपेक्षित कार्य के बीच मुख्य अंतर यह है कि अंतिम मार्ग निर्धारण सर्वेक्षण के दौरान अंतिम रूप से चुने गए संरेखण (alignment) में जमीन पर ,थियोडोलाईट और/या इलेक्ट्रॉनिक दूरी मापक उपकरणों से पूरी तरह खूंटी लगा दिए जाने चाहिए, रिपोर्ट पूर्ण होनी चाहिए तथा विस्तृत नक्शे एवं सेक्शन प्रस्तुत किए जाने चाहिए।


इंजीनियरी संहिता अध्याय दो एवं तीन

Material Modification (महत्वपूर्ण आशोधन)


Material Modification (महत्वपूर्ण आशोधन) पैरा 1109-1113 ई एवं ACS-59 


महत्वपूर्ण आशोधन किसी कार्य या योजना के प्रकृति में परिवर्तन करने का प्रतिनिधित्व करता है जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत होता है।

किसी स्वीकृत निर्माण कार्य अथवा योजना में, प्राक्कलन को स्वीकृति देने वाले प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन के बिना ,किसी महत्वपूर्ण आशोधन की ना तो अनुमति दी जानी चाहिए और ना किया जाना चाहिए। 

एडवांस करेक्शन स्लिप 59 E के तहत निम्नलिखित  मैटेरियल मोडिफिकेशन नहीं होगा।

(अ) रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नीति के कारण उत्पन्न होने वाले निम्लिखित कार्यों के विनिर्देशों या मानको में परिवर्तन-
(I) कंस्ट्रक्शन
(II) इंटरलॉकिंग
(III) इलेक्ट्रिफिकेशन
(IV)ट्रैक्शन
(V) SOD आवश्यकता

(ब) स्वीकृत यार्ड वर्क के कार्य को पूरा करने के दौरान कार्य को पूरा करने के लिए माइनर मोडिफिकेशन।

(स) वैधानिक/नियामक आवश्यकताओं के परिणामस्वरूप होने वाले संशोधन।

(द) निर्माण में मितव्ययता लाने और परियोजना की समय पर डिलीवरी के लिए संशोधन।

(ई) परियोजना को पूरा करने के लिए आवश्यक कोई भी कार्य।


* निम्नलिखित को मैटेरियल मोडिफिकेशन के रूप में माना जाएगा:-

कोई भी कार्य जो स्वयं स्वतंत्र कार्य है, लेकिन अनिवार्य रूप से मौजूदा कार्य के साथ किया जाना आवश्यक है, उसे मौजूदा कार्य में मैटेरियल मोडिफिकेशन के रूप में माना जाएगा, बशर्ते कि यह मौजूदा कार्य के साथ सीधे जुड़ा हो। इसकी मंजूरी बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी शक्तियों के प्रत्यायोजन के अनुसार होगी।


*रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत परियोजना जो महत्वपूर्ण आशोधन से भिन्न हो किसी आशोधन की मंजूरी महाप्रबंधक या किसी निम्नतम प्राधिकारी द्वारा दी जा सकती है बशर्ते की आशोधन के लिए किसी अतिरिक्त व्यय की आवश्यकता पड़ती है तो वह रकम उसकी स्वीकृति की शक्तियों से अधिक ना हो जाए।

महत्वपूर्ण आशोधन की स्वीकृति:

यदि रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत किसी परियोजना में , यदि निर्माण कार्य के वस्तुतः प्रारंभ होने के पूर्व किसी महत्वपूर्ण आशोधन को शामिल करना आवश्यक हो जाता है तो परियोजना का एक संशोधित संक्षिप्त प्राक्कलन तैयार करके रेलवे रोड के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। जब रेलवे बोर्ड अथवा उससे ऊंचे प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत किसी परियोजना में , निर्माण कार्य की प्रकृति के दौरान , किसी महत्वपूर्ण आशोधन को शामिल करना आवश्यक हो जाए तब तक संशोधित संक्षिप्त प्राक्कलन रेलवे बोर्ड को प्रस्तुत किया जाना चाहिए भले ही उसके फलस्वरूप स्वीकृत प्राक्कलन की राशि में कोई आधिक्य होने की संभावना ना भी हो। जब तक प्रस्तावित आशोधन को रेलवे बोर्ड का अनुमोदन प्राप्त ना हो जाए तब तक उस आशोधन पर ना तो कोई देयता उपगत की जानी चाहिए और ना ही बचत को , यदि इसके शामिल किए जाने में बचत होने की संभावना हो ,किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए।

कोई ऐसा आशोधन जो विशुद्ध इंजीनियरिंग कारणों से आवश्यक हो और व्यय ₹10000 से कम हो तो कार्यपालक इंजीनियरों को साधारणतः ऐसे आशोधन के प्रस्ताव को उच्चतर प्राधिकारी को भेजने की जरूरत नहीं है।


(2010WO,2016WO,2017-18W)



Friday, 1 May 2020

IRFC (INDIAN RAILWAY FINANCE CORPORATION)

IRFC-INDIAN RAILWAY FINANCE CORPORATION

भारतीय रेलवे वित्त निगम

  •  दिसंबर 1986 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में आईआरएफसी की स्थापना की गई थी।
उद्देश्य- रेल मंत्रालय के योजनागत परिव्यय के लिए आंशिक वित्तपोषण करना तथा उसकी विकास समान आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बाजार से धनराशि प्राप्त करना है।

रेलवे को इस उपार्जन से अपने यातायात आउटपुट में वृद्धि एवं राजस्व वृद्धि में सहायता मिलती है।

  • आईआरएफसी का एकमात्र ग्राहक भारतीय रेलवे है।
  • आईआरएफसी बांड जारी करके बैंक/वित्तीय संस्थानों से कैपिटल गैन बॉन्ड ,सावधिक ऋण तथा बाहरी वाणिज्यिक उधार/निर्यात क्रेडिट आदि के माध्यम से धनराशि एकत्रित करती है।
  • आईआरएफसी रोलिंग स्टॉक रेल परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण करती है एवं रेलवे को पट्टे पर देती है।
  • इस कंपनी ने 31 मार्च 2019 तक रेलवे को 195626 करोड़ रुपए मूल्य की चल स्टॉक परिसंपत्ति पट्टे पर दी है ।31 मार्च 2019 तक रेल परियोजनाओं को ₹58715 करोड़ रुपए वित्त पोषित किया है।2018-19 में पट्टा किराया 11.208% प्रतिवर्ष  आईआरएफसी द्वारा कर दिया गया है।मंत्रालय नियमित रूप से पट्टे का भुगतान करती है।
  • आईआरएफसी का निरंतर लाभ अर्जित करने में रिकॉर्ड रहा है ।इसने अबतक 3324 करोड़ रुपया लाभांश का भुगतान किया है इसकी सुदृढ़ वित्तीय स्थिति और स्थाई साख के आधार पर इसमें तीन प्रमुख घरेलू क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से उच्चतम रेटिंग और चार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से सम्प्रभुता के समतुल्य निवेश ग्रेड प्राप्त किया है।

आईआरएफसी का लीज टर्म

  • लीज पीरियड 30 वर्ष का होता है।
  • आईआरएफसी संपत्ति को मानक लीज अनुबंध के आधार पर रेलवे को देती है।
  • भारतीय रेल प्रत्येक छमाही में लीज रेंट का भुगतान करती है।
  • 30 वर्ष के बाद रोलिंग स्टॉक,परिसंपत्तियों को भारतीय रेलवे को नॉमिनल दर पर बेच सकती है।

आईआरएफसी लीज चार्ज-लेखांकन पॉलिसी

  • 2005 से पहले IRFC के लीज चार्ज जिसमें प्रिंसिपल और ब्याज शामिल होता है जो IRFC को भुगतान किया जाता था, मांग संख्या 09-Abstract-G Operating Expenses Traffic को प्रभावित (charge) किया जाता था।
  • 2005 के बाद लेखांकन नीति में बदलाव किया गया है अब IRFC को जो लीज प्रभार दिया जाता है।

प्रिंसिपल घटक-प्लान हेड 2200 लीज Assets (Demand No.-16)

ब्याज घटक -मांग संख्या 09-Abstract-G Operating Expenses traffic

  • इसके फलस्वरूप OWE(Ordinary Working Expenses) में कमी आई है।

Thursday, 30 April 2020

Approved List of Contractors

Approved list of Contractors (ठेकेदारों के अनुमोदित सूची) पैरा 1215E,1216E


रेलवे मंडल स्तर पर एवं मुख्यालय स्तर पर निर्धारित राशि के लिए कार्य संपन्न करवाने के लिए ठेकेदारों की एक अनुमोदित सूची रखती है।

साधारणतः किसी निर्माण कार्य या सप्लाई का निष्पादन ऐसे किसी ठेकेदार को नहीं दिया जाना चाहिए जिसकी योग्यता और वित्तीय हैसियत के बारे में पहले से जांच ना कर लिया गया हो और उन्हें संतोषजनक न पाया गया हो। इस प्रयोजन के लिए रेलवे के मुख्यालय और मंडल कार्यालयों में अनुमोदित ठेकेदारों की सूची रखी जानी चाहिए अन्य ठेकेदारों जिन्होंने संतोषजनक काम किया हो ,को वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी अथवा मंडल अधिकारी के नाम से सूची में शामिल किया जा सकता है।

 रेलवे के मुख्यालय तथा मंडल कार्यालयों में अनुमोदित ठेकेदारों की सूची बनाई जाए तथा उसका रखरखाव किया जाए जहां इच्छुक ठेकेदार नीचे उल्लिखित प्रक्रिया का पालन करते हुए रेलवे कार्य शुरू करेंगे।

  • वर्ष में एक बार विज्ञापन आदि के माध्यम से व्यापक प्रचार करके इच्छुक ठेकेदारों को विभिन्न श्रेणियों के लिए अपने नाम पंजीकृत कराने के लिए आमंत्रित किया जाए ।अनुमोदित सूची में पहले से शामिल ठेकेदार तथा जिन ठेकेदारों ने रेलों पर संतोषजनक कार्य निष्पादित किया है तथा इसके द्वारा वे भविष्य में कार्य के आवंटन के लिए योग्य हो गए हैं को भी अपने नाम पंजीकृत कराने के लिए आमंत्रित किया जाए।
  • पंजीकरण के लिए मूल आवश्यकता निर्धारित की जाए और पंजीकरण के लिए चयन में स्वविवेक और मध्यस्थता को कम करने के लिए इसे लोकप्रिय बनाया जाए।
  • जहां अपेक्षित हो ,स्वतंत्र तथा सक्षम एजेंसी के रूप में संतोषजनक ढंग से कार्य निष्पादित करने के लिए इच्छुक ठेकेदारों की क्षमता, रेलवे की कार्यों के संतोषजनक निष्पादन के लिए उनकी वित्तीय सक्षमता, विशेषज्ञता का क्षेत्र ,पिछला अनुभव व्यक्तिगत रूप से अथवा सक्षम तथा अर्हक/प्राधिकृत इंजीनियरों /पर्यवेक्षकों के माध्यम से कार्य का पर्यवेक्षण करने की समर्थता की जांच की जाए तथा उन्हें सूची में रखने से पूर्व जांच पड़ताल की जाए।
  • ऐसे पंजीकृत निविदाओं के लिए लेखन शुल्क तथा उन्हें नोटिस भेजने की लागत के रूप में ₹2000 की वार्षिक फीस प्रभावित की जाए।
  • अनुमोदित सूची में रखने के लिए ठेकेदारों का चयन वैल्यू स्लैबों वाली समिति द्वारा किया जाए तथा स्वीकारकर्ता प्राधिकारी द्वारा स्वीकार की जाए ।स्वीकृति के लिए  समिति तथा प्राधिकारी की संरचना रेलवे बोर्ड द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए गए अनुसार होगी।
  • अनुमोदित ठेकेदारों की सूची की गोपनीय सरकारी रिकॉर्ड मानी जाए तथा सूची में रखे गए ठेकेदारों के नाम की जानकारी अन्य ठेकेदारों को नहीं होनी चाहिए इसे साफ तथा सुस्पष्ट तरीके से अपडेड रखा जाय।
  • 7.5 करोड़ तक के कार्यों के लिए ठेकेदारों को पंजीकृत किया जाएगा ठीक उसी तरह सीमित निविदा में 7.5 करोड़ तक के कार्यों को सम्मिलित किया जाता है।
  • अनुमोदित सूची में ठेकेदार 3 साल तक के लिए वैध रहेगा।
  • इस लिस्ट में से नाम हटाने और जोड़ने के लिए  प्रत्येक वर्ष समीक्षा की जाएगी जो जुलाई से प्रभावित होगा।अगर कोई छः महीने के अंदर नाम हटाया गया हो या जोड़ा गया हो तो वो 1st जनवरी और 1st जुलाई से प्रभावित होगी।
  • ओपन लाइन एवं निर्माण संगठन (construction organization) दोनों जगह अलग-अलग अनुमोदित सूची होगा।
  • ओपन लाइन में वर्ग 'बी', 'सी' की कैटेगरी के अनुमोदित ठेकेदारों की सूची का मेंटेन मंडल स्तर पर होगा एवं 'ए' श्रेणी के लिए एक कॉमन लिस्ट होगा जो जोन में होगा । ठीक उसी तरह निर्माण क्षेत्रों के लिए 'बी' 'सी' श्रेणी के ठेकेदारों के अनुमोदित सूची का मेंटेन Dy.CE(C) कार्यालय में होगा एवं 'ए' श्रेणी के ठेकेदारों की सूची का मेंटेन का मुख्यालय में यानी CAO/C,GM/C कार्यालय में होगा।
  • अनुमोदित सूची में पंजीकरण के लिए ठेकेदारों से राशि ली जाएगी जो नॉन रिफंडेबल होगी। यह राशि इस प्रकार होगी 'सी' कैटेगरी के लिए ₹15,000 हजार,'बी' कैटेगरी के लिए ₹20,000 हजार एवं 'ए' कैटेगरी के लिए ₹ 30,000 हजार।



कैटेगरी/स्लैब
चयन समिति
स्वीकृत प्राधिकारी
स्वीकृत राशि
वर्ग 'सी
दो JAG अधिकारी एक कार्यकारी  विभाग से एवम एक लेखा विभाग से
मंडल में DRM एवम मंडल से बाहर SAG अधिकारी  
          

(up to ₹ 37.5 lakh)
वर्ग 'बी
उपरोक्त
उपरोक्त
 (more than ₹37.5 lakh and up to ₹1.5 crore)
वर्ग ''
दो SAG अधिकारी एक कार्यकारी विभागसे एवम एक वित्त विभाग से
PHOD  
(more than ₹1.5 crore and upto ₹7.5 crore)




(2000W,2006W,2015W)




Tuesday, 28 April 2020

Exchequer Control



राजकोष नियंत्रण (Exchequer Control) पैरा 540F


राजकोष नियंत्रण एक ऐसी व्यवस्था है ,जिसके द्वारा बजट आवंटन के नगदी अंश में से प्रत्येक संवितरण अधिकारी (disbursing officer )द्वारा किए जाने वाले 'नगदी-निर्गमन' (cash outgo) का समुचित विनियमन (Regulation) किया जाता है।

रेलवे द्वारा किए जाने वाले व्यय को दो श्रेणियों में बांटा गया है।

1. नगद (cash)-70% लगभग
2.समायोजन (Adjustment)- 30% लगभग

पहली श्रेणी में वे सभी लेनदेन आते हैं जो नगद भुगतान या चेक जारी करके पूरे किए जाते हैं । मोटे तौर पर इस श्रेणी में कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों को किया जानेवाला भुगतान और सप्लाई और सेवाओं के उपलक्ष्य में निपटाए जाने वाले बिल/दावा भी शामिल है।

द्वितीय श्रेणी में समायोजन (adjustment) आता है जिसमें लेखा यूनिटों के आंतरिक लेनदेन होता है जिसमें नगदी का निर्गमन नहीं होता है।

* राजकोष नियंत्रण नगदी निर्गमन पर नियंत्रण रखता है ।

उद्देश्य :- राजकोष नियंत्रण का उद्देश्य है एक ऐसी पद्धति की स्थापना करना जिससे नगदी-निर्गमन (cash outgo) का सही अनुमान हो सके और भुगतान की प्रगति पर यथोचित नियंत्रण रखा जा सके। इस प्रकार यह बजट नियंत्रण का महत्वपूर्ण साधन भी है।

- प्रत्येक लेखा यूनिट अपने नगद आवश्यकता को प्रत्येक महीने के 15th/18th तारीख को मुख्यालय के बुक्स अनुभाग यानि FA&CAO/BOOKS को भेजते हैं।

ये नगद आवश्यकता निम्नलिखित प्रारूप में रहता है।

खंड (segments). 
 रुपये (amounts)
1.राजस्व मांग   
   (a) स्टाफ भुगतान
   (b)अन्य भुगतान


2.कार्य मांग

  (a)पूंजी (capital)
  (b)रेलवे निधि


3.अन्य बजट मदें (Non-Budget Items)



  • सभी लेखा यूनिटों की आवश्यकता को बुक्स अनुभाग में संकलित किया जाता है एवं पूरे मांग के अनुसार महीने के 20वें तारीख तक रेलवे बोर्ड को भेज दिया जाता है।
  •  रेलवे बोर्ड कैश ऑथराइजेशन को प्रथम या दूसरी कार्य दिवस में क्षेत्रीय रेलों को सूचित कर देता है और उसी आधार पर क्षेत्रीय रेल अपनी लेखा यूनिटों को सूचित कर देता है।
  • वर्तमान महीने के आवश्यकता को समीक्षा किया जाएगा एवं अगर अतिरिक्त मांग की आवश्यकता होगी तो रेलवे बोर्ड को 20 तारीख तक सूचित करना होगा साथ में अगले महीने के नगद आवश्यकता भी होगी।
  • बांटे गए नगदी में से अगर रकम किसी यूनिट द्वारा खर्च नहीं हो सका तो उस राशि को मुख्यालय में सरेंडर कर दिया जाता है ताकि किसी दूसरे यूनिट को जिसे आवश्यकता है दिया जा सके। उसी तरह अगर मुख्यालय बुक अनुभाग के पास सरेंडर राशि है तो वह अंतिम कार्य दिवस में रेलवे बोर्ड को भेज देते हैं।

Net Withdrawal (शुद्ध निकासी)

मौजूदा नियमों के तहत, केंद्रीय सरकार के सभी नगद प्राप्तिओं को तुरंत ही आरबीआई (CAS/नागपुर) में जमा किया जाना चाहिए और सभी भुगतान आरबीआई से निकासी के माध्यम से ही किए जाने चाहिए किसी निश्चित अवधि के दौरान जमा और निकासी के बीच का अंतर शुद्ध निकासी (Net Withdrawal) के रूप में जाना जाता है।

 जमा पर निकासी की अधिकता से उत्पन्न नकारात्मक अंतर सरकार के घाटे को बढ़ाता है।


(2000W,2001WO,2015W)





Saturday, 25 April 2020

Forms of Works Contracts

ठेकों के प्रकार
ठेकों के निम्नलिखित रूप निर्माण कार्य ठेकों पर लागू करने के लिए है।

I)एक मुश्त ठेके (Lumpsum Contract)
II)अनुसूचित ठेके (Schedule Contract)
III)फुटकर ठेके (Piece Work Contract)
IV)ईपीसी कॉन्ट्रैक्ट (Engineering, Procurement and construction Contract)

I) एक मुश्त ठेके (Lumpsum Contract) पैरा 1205 E-1206E

एकमुश्त ठेका वह ठेका है जिसके अंतर्गत ठेकेदार यथा विनिर्दिष्ट निर्माण कार्य या सामान की सप्लाई एक निश्चित अवधि में और नियत समग्र धनराशि के लिए करता है ।उसे धनराशि प्राप्त होना इस बात पर निर्भर करता है कि वह निर्माण कार्य सामान की सप्लाई विशिष्टों (specifications) के अनुसार ,ठीक समय से पूरा कर दे ,भले ही उसे पूरा करने में उसे वस्तुतः चाहे जितना और चाहे जितनी प्रकार का काम और सामान की सप्लाई करनी पड़े ।

ऐसे ठेकों के मामलों में दरों या कीमतों के एक स्केल पर समझौता किया जा सकता है, ताकि बाद में सक्षम प्राधिकारी के आदेश के अंतर्गत ,यदि यथा विनिर्दिष्ट निर्माण कार्य या सामान की सप्लाई के संबंध में कोई परिवर्तन किया जाए, तो एक मुश्त राशि में उसे स्केल के अनुसार वृद्धि या कमी की जा सके ; या ठेकेदारों द्वारा विशिष्टियों के अनुसार निर्माण कार्य या सामान की सप्लाई न किए जाने पर सक्षम प्राधिकारी के विवेक पर कटौती की जा सके।

II)अनुसूचित ठेका (schedule Contract) 1207 E

अनुसूचित ठेका ऐसा ठेका है जिसके अंतर्गत ठेकेदार यथा विनिर्दिष्ट निर्माण कार्य या सामान की सप्लाई एक निश्चित अवधि में और उस कार्य या सामान की सप्लाई की विभिन्न मदों में से प्रत्येक के लिए निश्चित या कीमतों पर करता है । उसे इसके लिए जो धनराशि प्राप्त होनी है वह इस बात पर निर्भर है कि यथाविनिर्दिष्ट और यथा समय काम या सप्लाई पूरी करने के लिए वस्तुतः कितना और किस प्रकार का कार्य किया गया और सामान सप्लाई किया गया है। ऐसे ठेकों में  स्थूल मात्राओं और नियत यूनिट दरों के आधार पर ठेके की स्थूल राशि दिलाना उपर्युक्त परिभाषा के विपरीत नहीं है

III)फुटकर ठेका (Piecework Contract) 1208 E

इसका अर्थ है वह ठेका जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य सामान की केवल यूनिट दरों और कीमतों के बारे में करार किया जाता है ,लेकिन इस बात का जिक्र नहीं किया जाता है कि कुल कितना निर्माण कार्य या सामान सप्लाई किया जाना है या कितनी अवधि में किया जाना है ।जोनल कॉन्ट्रैक्ट (क्षेत्रीय ठेके) रेलवे में इसी कोटि में आते हैं।

नोट :-फुटकर निर्माण कार्य के ठेके की उपर्युक्त परिभाषा के अनुसार:

  1. रेलवे इस बात का संकेत दे सकती है कि उसका अधिक से अधिक कितने मूल्य का ऑर्डर देने का इरादा है ,लेकिन ठेकेदार निर्माण कार्य या सप्लाई की एक यूनिट से अधिक आर्डर प्राप्त करने का दावा नहीं कर सकता है।
  2. ठेके का निष्पादन हो जाने के बाद निर्माण कार्य या सप्लाई के लिए आर्डर दिए जा सकते हैं,
  3. प्रगति की रफ्तार चाहे विनिर्दिष्ट ना की जाए ,लेकिन यदि यह संतोषजनक नहीं है तो ठेका समाप्त किया जा सकता है।
  4. नए निर्माण कार्य, मौजूदा संरचना में परिवर्तन, विशेष मरम्मत कार्य और निर्माण सामग्री की सप्लाई लेकिन शर्त यह है कि ऐसे प्रत्येक निर्माण कार्य का ठेका ₹2 लाख से अधिक ना हो।
  5. साधारण मरम्मत और अनुरक्षण के कार्य और
  6. आवश्यक ईट ,चूना, बालू आदि सामग्री की ढुलाई।
IV)ईपीसी कॉन्ट्रैक्ट (Engineering, Procurement, construction)

इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन ठेके प्राइवेट सेक्टरों में प्रयोग किया जाता है जहां बड़े पैमाने पर निर्माण परियोजनाओं का कार्य होता है ।ईपीसी अनुबंध के तहत एक ठेकेदार को एक निश्चित तारीख तक एक निश्चित मूल्य लिए एक पूर्ण अनुबंध देने की आवश्यकता होती है। इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कॉन्टेक्टर प्रोजेक्ट के विवरण इंजीनियरिंग डिजाइन को पूरा करेगा, आवश्यक सभी उपकरणों और सामग्रियों की खरीद करेगा और फिर अपनी ग्राहकों को कार्य सुविधा देने के लिए निर्माण करेगा। कंपनियां जो ईपीसी प्रोजेक्ट देती है उन्हें आमतौर पर ईपीसी ठेकेदारों के रूप में जाना जाता है।

Thursday, 23 April 2020

Performance Guarantee

Performance Guarantee (standard GCC Clause 16(4)

परफॉर्मेंस गारंटी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है।


  • जो भी सफल निविदाकार है वह परफॉर्मेंस गारंटी एल ओ ए (Letter of Acceptance)जारी होने के 21 दिन के भीतर प्रस्तुत करेंगे ।
  • 21 दिन के बाद एवं 60 दिन तक पीजी प्रस्तुत करने की समय वृद्धि अधिकृत प्राधिकारी द्वारा दिया जा सकता है जो निविदा अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत है।
  • 22वें दिन से 60 वें दिन तक, इस बीच में अगर ठेकेदार द्वारा पीजी प्रस्तुत किया जाता है तो 22 वें दिन से लेकर जिस दिन पीजी प्रस्तुत किया गया 12% प्रति वर्ष की दर से ब्याज ठेकेदार पर प्रभावित होगा। अगर संयोगवश 60 वें दिन संबंधित कार्यालय में अवकाश रहेगा तो अगले दिन पीजी स्वीकार्य होगा।
  • अगर निविदा का 60 में दिन के बाद भी अपेक्षित पीजी प्रस्तुत नहीं करता है तो अनुबंध को समाप्त कर दिया जाएगा और ईएमडी जब्त कर ली जाएगी। यदि निविदाकार ईएमडी प्रस्तुत नहीं किया हो क्योंकि उनका पंजीकरण स्टार्टअप के रूप में डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत है के साथ हो तो विभाग को सूचित कर दिया जाएगा।
  • असफल ठेकेदार को उस कार्य के पुनः प्रस्ताव(Re-tender) के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
  • सफल बोली दाता (ठेकेदार )कांटेक्ट वैल्यू के 5% पीजी निम्नलिखित में से किसी भी रूप में प्रस्तुत करेंगे
i) नगद जमा
ii) अपरिवर्तनीय बैंक गारंटी
iii) सरकारी प्रतिभूति सहित बाजार मूल्य से 5% स्टेट लोन बॉन्ड
iv) जमा रसीद ,पे ऑर्डर ,डिमांड ड्राफ्ट और गारंटी बॉन्ड जो किसी राष्ट्रीय कृत बैंक का हो।
v) सभी अनुसूचित बैंकों का जमा रसीद
vi) पोस्ट ऑफिस सेविंग बैंक का डिपॉजिट
vii) राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्रों में जमा
viii) 12 साल का राष्ट्रीय रक्षा प्रमाण पत्र
ix) 10 वर्ष का राष्ट्रीय रक्षा जमा
x) राष्ट्रीय रक्षा जमा
xi) यूनिट ट्रस्ट प्रमाण पत्र जो बाजार मूल्य से 5% कम हो या उसका अंकित मूल्य जो भी कम हो एफडीआर जो FA&CAO के नाम से हो स्वीकृत है।
  • कार्य के दौरान अनुबंध मूल्य में 25% तक कमी बेशी होने पर पी जी के वैल्यू में कोई कमी बेशी नहीं होगी अगर 25% से ज्यादा कमी बेशी हो रही है तो अतिरिक्त उस मूल्य का 5% पीजी ज्यादा होने पर लिया जाएगा एवं कमी होने पर ठेकेदार को लौटा दिया जाएगा।
  • भौतिक रूप से कार्य समाप्त होने के बाद एवं अधिकृत प्राधिकारी द्वारा जारी 'समापन प्रमाण पत्र' जिसमें यह कहा गया हो  कि ठेकेदार ने सभी तरह से संतोषजनक ढंग से काम पूरा किया है एवं  ठेकेदार को पीजी जारी किया जा सकता है ।
  • काम शुरू होने के बाद ,जब भी अनुबंध को रद्द या वापस किया जाएगा
(अ)सिक्युरिटी डिपॉजिट (SD) को जब्त कर लिया जाएगा।
(ब)परफॉर्मेंस गारंटी को नगदी (भुना) करवा लिया जाएगा
(स)असफल ठेकेदार के शेष कार्य बिना जोखिम और लागत के स्वतंत्र रूप से किया जाएगा ।इसके लिए शेष कार्य का फ्रेश टेंडर निकाला जाएगा ।
(द)असफल ठेकेदार को शेष कार्य के निष्पादन के लिए निविदा में भाग लेने से वंचित किया जाएगा।

Tuesday, 21 April 2020

Advance to Contractor (ठेकेदारों को अग्रिम)


  • भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग कोड अध्याय 12 पैरा 1264 E
  • कार्यालयों का यह कर्तव्य होगा कि जहां तक संभव हो अग्रिम राशि ना दें और वे ऐसी प्रणाली बनाने का प्रयास करें जिसमें जितना काम वस्तुतः हुआ है, उसके लिए भुगतान के अलावा और कोई भुगतान न किया जाए।
  • हालांकि महाप्रबंधक अपनी शक्तियों के प्रत्यायोजन में पूंजीगत गहनता वाले तथा विशिष्ट प्रकृति के निर्माण कार्य जिनके अनुमानित मूल्य 50 करोड़ से अधिक है स्वीकृति दे सकते हैं।
  • यह अग्रिम चार प्रकार के हैं।

I जुटाव अग्रिम (Mobilisation Advance)

यह संविदा के मूल्य के 10 % तक होगा और इसका भुगतान दो चरणों में किया जाएगा। 

चरण-I-- संविदा करार पर हस्ताक्षर करने पर संविदा मूल्य का 5%

चरण-II-- स्थल कर्मचारियों , कार्यालय स्थापित करने, उपस्कर लाने और निर्माण कार्य को वस्तुतः प्रारंभ करने पर 5%

अग्रिम के इन दो चरणों में भुगतान क्रमशः संविदा हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद और प्रबंध करने के समय किया जाएगा।

II मशीन और उपस्कर के लिए अग्रिम (Advances against Machinery and Equipment)

  • यह अग्रिम कार्यस्थल पर लाई गई नई मशीनरी और उपकरण के बदले अनुबंध मूल्य के अधिकतम 10% सीमित होगी साथ ही यह अग्रिम उपकरण के खरीद मूल्य के 75% तक सीमित रहेगी।
  • यह तभी देय होगी जब तक उपर्युक्त बोर्ड के माध्यम से यह राष्ट्रपति को हाइपोथैकेटेड (दृष्टि बंधक) कर दी जाए या विकल्पतः रेलों को स्वीकार्य किसी रूप में भारतीय स्टेट बैंक से या भारत के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक से संयंत्र और उपस्कर की पूरी लागत के लिए एक अप्रतिसंग्रहनिय  बैंक गारंटी दी जाए।
  • यह सिर्फ नई मशीनरी के लिए दी जाएगी जो मशीन साइट पर लाया जाएगा।
  • इस संयत्र और उपस्कर की पूरी मूल्य के लिएअपेक्षित पूरी अवधि के लिए बीमा कराया जाना होगा ।
  • यह अग्रिम पुरानी मशीन और संयंत्र पर नहीं दिया जाएगा।
  • यह संयंत्र और उपस्कर इंजीनियर की लिखित अनुमति के बिना कार्यस्थल पर नहीं हटाया जाएगा।
III संविदा के निष्पादन के दौरान निर्माण कार्यों की प्रगति में तेजी लाने के लिए अग्रिम

  • इस अग्रिम का निर्धारण मूल्य के आधार पर विनिश्चय किया जाता है। यह प्रत्येक निविदा के मेरिट के आधार पर तय होगा।
  • इसे संबद्ध प्रमुख वित्त सलाहकार के परामर्श से PCE की सिफारिशों पर महाप्रबंधक द्वारा मंजूर किया जाएगा ।
  •  यह अग्रिम संविदा मूल्य के अधिकतम 5% तक दिया जाएगा।

IV असाधारण मामलों में अग्रिम (Advances in exceptional cases)

  • 50 करोड़ से कम मूल्य की ऐसी ही संविदाओं के संबंध में महाप्रबंधकों को आपवादिक मामलों में ₹20 लाख तक अग्रिम स्वीकृत करने का अधिकार प्राप्त है।
  • यदि वे प्रभारी मुख्य इंजीनियर (PCE)द्वारा संस्तुत और सम्बद्ध वित्त के परामर्श से (PFA)प्रत्येक स्थिति में गुण दोष की परिस्थितियों पर नजर रखते हुए परम आवश्यक समझते हो।

उपर्युक्त अग्रिम निम्नलिखित शर्तों के अधीन है-
  1. अग्रिम पर ब्याज देय होगा, ब्याज की दर रेलवे बोर्ड द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में सूचित कर दिया जाएगा ।यह उस वित्तीय वर्ष में खोले गए निविदाओं के लिए लागू होगा।
  2. मशीनरी और उपकरण के विरुद्ध स्वीकृत  अग्रिम के लिए जो अपरिवर्तनीय बैंक गारंटी के विरुद्ध स्वीकार्य है स्वीकृत अग्रिम के 110 प्रतिशत बैंक गारंटी के रूप में जमा करना होगा ।बैंक गारंटी भारत के राष्ट्रीयकृत बैंक या भारतीय स्टेट बैंक से रेलवे को स्वीकार्य होगी।
  3. वसूली तब प्रारंभ की जाएगी जब निष्पादित कार्य (executed work) का मूल्य मूल अनुबंध मूल्य का 15% तक पहुंच जाए।
  4. वसूली तब समाप्त होगी जब निष्पादित कार्य का मूल्य मूल अनुबंध मूल्य के 85% तक पहुंच जाएगा।
  5. किस्त की राशि प्रत्येक ऑन अकाउंट बिल से प्रो रेटा के आधार पर काटी जाएगी।
  6. अग्रिम राशि प्रदान करना मुख्यतः रेलवे के अपने हित में हो।
  7. एक ही निर्माण के लिए विभिन्न अधिकारियों से अग्रिम राशि नहीं ली जा सकती है।
  8. इन अग्रिमों के भुगतान और वसूली की जिम्मेदारी का लेखा जोखा लेखा कार्यालय की होगी।
  9. इस बात के लिए संभव पूर्वोपाय (necessary precautions) किए जाएं कि सरकार को किसी प्रकार के हानि की संभावना ना हो और यह प्रणाली बहुत सामान्य ना बन जाए अथवा उससे अधिक जारी ना हो जितनी कार्य की समुचित प्रकृति के लिए नितांत आवश्यक है।

ब्याज की वसूली (Method of Recovery of interest)

  • ब्याज की अदायगी अग्रिम के भुगतान के तारीख से ऑन अकाउंट बिल के तारीख तक की जाएगी।
  • यथा अनुपात मूलधन की वसूली सहित ऑन अकाउंट बिल में पूर्णतया समायोजित की जाएगी।
  • इसमें किसी भी प्रकार से कमी होने के मामले में ब्याज की वसूली की जाएगी तथा अगला ऑन अकाउंट बिल में अग्रेषित किया जाएगा।
  • ऐसे अग्रिमों  के लिए बैंक गारंटी में स्पष्ट तौर से स्वीकृत अग्रिम का 110% कवर होगा (जिसमें मूलधन और ब्याज कवर हो)


Sunday, 19 April 2020

Security Deposit ( जमानत की रकम)


  1. जमानत की रकम सफल निविदाकार से ठेके को उचित ढंग से पूरा करने के प्रमाण के रूप में जमा कराई जाती है।
  2. जमानत की रकम निविदा के मूल्य के 5% जमा कराई जाती है। 
  3. जमानत की रकम को ठेकेदार द्वारा प्रथम ऑन अकाउंट बिल से पहले नगद में जमा किया जा सकता है या जमा रसीद जो अनुसूचित बैंक का हो या ठेकेदार के रनिंग बिलों से 6% की दर से वसूला जा सकता है जब तक की पूरा जमानत की रकम वसूल ना हो जाए।
  4. डिफॉल्ट ठेकेदार के मामले में रेलवे लंबित भुगतान की राशि को रिटेंड (बरकरार) रख सकता है। जो राशि बरकरार रखी गई है (जिसमें परफॉर्मेंस गारंटी भी है ) वह निविदा के मूल्य के 10% से ज्यादा नहीं हो सकता है।
  5. अगर निविदा का मूल्य 50 करोड़ या उससे ज्यादा हो तो जमानत की रकम को अनुसूचित बैंक द्वारा जारी किए गए बॉन्ड को भी जमा किया जा सकता है निविदा दस्तावेज पर कार्यवाही शुरू होने के बाद किंतु प्रथम ऑन अकाउंट बिल से पहले करना होगा। आगे बैंक गारंटी की वैलिडिटी को समय-समय पर बढ़ाया जाएगा यह जीसीसी के क्लॉज 17 एक्सटेंशन ऑफ कॉन्ट्रैक्ट गारंटीड पर निर्भर है।
  6. अगर जमानत की रकम को जमा रसीद , बैंक गारंटी बॉन्ड के रूप में पूरा जमा कर दिया गया हो तो ठेकेदार के बयाने की रकम को रेलवे द्वारा वापस कर दिया जाएगा।
  7. भौतिक रूप से कार्य समाप्ति होने पर एवं अधिकृत अधिकारी द्वारा प्रमाणित होने के बाद जमानत की रकम को वापस कर दिया जाएगा।
Refund of Security Deposit.

I) निविदा के अंतिम भुगतान के बाद।
II) अंतिम सप्लीमेंट्री अनुबंध पर हस्ताक्षर या इंजीनियर द्वारा जारी प्रमाण पत्र जिसमें यह लिखा हो कि ठेकेदार पर कोई दावा (claim) नहीं है।
III) रखरखाव अवधि के समाप्ति के बाद जारी प्रमाण पत्र के आधार पर।

Earnest Money Deposite

Earnest Money Deposited (बयाने की रकम) पैरा 1241 E
  • बयाने की रकम उन सभी इच्छुक ठेकेदारों से ली जाती है जो टेंडर लेना चाहता है। 
  • सभी प्रकार के टेंडर के लिए यह लिया जाता है। 
  • बयाने की रकम लेने का उद्देश्य यह  है की यदि ठेकेदार को टेंडर मंजूर होने के बाद निर्धारित समय के भीतर टेंडर का काम शुरू न कर पाए या निर्धारित जमानत की रकम (SD) नहीं  जमा कर पाए तो उस से होने वाले नुकसान की भरपाई किया जा सके या तब तक के लिए काफी हो जब तक की ठेकेदार का दे राशियों (sum due) से काफी गारंटी ना हो जाये।
  • ब्याने की रकम को BID SECURITY भी कहा जाता है । 

ब्याने  की रकम किसी भी कार्य  के लिए इस प्रकार  है - 

कार्य का वैल्यू      

ब्याने की रकम

एक करोड़ तक के कार्य के लिए

प्राक्कलित मूल्य का 2%

एक करोड़ से ज्यादा मूल्य के  प्राक्कलित कार्य के लिए

2 लाख एवं एक करोड़ से ज्यादा मूल्य का  0.5% , एवं अधिकतम 1 करोड़

 



  • यह निविदा के साथ भुगतान किया जाना चाहिए तथा इसके बिना निविदा को अस्वीकार कर दिया जाता है।
  • कोई फार्म जो DIPP (डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन) से स्टार्ट अप के रूप में पंजीकृत होगा उसे ईएमडी जमा करने से छूट दी जाएगी।
  • लेबर कोपरेटिव सोसाइटी निर्धारित ब्याने की रकम के 50% तक ही जमा करेगी । 
  • निविदादाता के उसके प्रस्ताव को निर्धारित समय जो नियम के तहत है  के भीतर, अपना प्रस्ताव वापस लेने अथवा उसके निविदा स्वीकार करने के पश्चात संविदा के निष्पादन में असफल होने के मामले में बयाने की पूरी राशि जप्त कर ली जाएगी । 
  • सफल निविदाकार के बयाने की राशि को जमानत की राशि में बदल दिया जाएगा एवं सभी असफल निविदाकार को ईएमडी की रकम वापस कर दिया जाएगा ।रेलवे वापस होने वाले ईएमडी पर किसी प्रकार का ब्याज का भुगतान नहीं करेगी।
  • ईएमडी नगद के रूप में ई पेमेंट गेटवे के माध्यम से जमा किया जाएगा या बैंक गारंटी बॉन्ड के रूप में या निविदा दस्तावेज में जो निर्देश दिया गया है उस आधार पर जमा किया जाएगा।
  • अगर बैंक गारंटी के रूप में जमा किया जाए तो उसे IREPS पर स्कैन कॉपी अपलोड करना होता है एवं आरिजिनल बैंक गारंटी 5 कार्य दिवस के भीतर संबन्धित कार्यालय मे देना होता है । 
  • बैंक गारंटी बॉन्ड बोली  लगाने के लिए जो समय निर्धारित है उसके 90 दिन बाद तक के लिए वैध होगा । 
  • बीड सेकुरिटी को राउंड फिगर 100 में होना चाहिए और यह टेंडर के सभी मोड्स पर लागू होना चाहिए । 


(2004WO,2006 WO, 2012WO,2016WO,2017-18W)