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Monday, 14 March 2022

Monday, 10 January 2022

OPTION CLAUSE

 

OPTION CLAUSE


  1. ऑप्शन क्लॉज़ स्टोर कॉन्ट्रैक्ट में अपनाया जाता है। ऑप्शन क्लॉज का अर्थ है कि ऐसे अनुबंध जो अनुबंधित हो गया है रेलवे अपने हित में Quantity (मात्रा) को +/-30% तक सामग्री प्राप्त होने के समय तक या अगर सामग्री प्राप्त होने की समय सीमा बढ़ाई गई है तो उस समय तक बढ़ा/घटा सकती है।
  2. यह स्पेशल कंडीशन ऑफ कॉन्ट्रैक्ट के तहत फिक्स क्वांटिटी ऑफ कॉन्ट्रैक्ट के लिए, वैसे मेटेरियल जो लगातार प्रयोग करने की प्रकृति का है उस पर अपनाया जाता है।
  3. ऑप्शन क्लोज वैसे अनुबंध के लिए अपनाया जाता है जिसका न्यूनतम वैल्यू 75 लाख हो। हालांकि खरीद मूल्य 75 लाख से कम होने पर भी ऑप्शन क्लोज लगाया जा सकता है अगर रेलवे के फायदे में हो एवं मेटेरियल continuing nature के हो।
  4. टेंडर स्वीकृत करने वाले प्राधिकारी ऑप्शन क्लोज को अनुमोदित कर सकते हैं , इसके लिए वित्तीय सहमति की आवश्यकता नहीं होती है सिर्फ जो मोडिफिकेशन किया गया है उसका वेट फाइनेंस से करवाया जा सकता है Non TC(tender committee) के मामले में वित्तीय सहमति की आवश्यकता है।
  5. खरीददार ऑप्शन क्लोज को एक या एक से ज्यादा किस्तों में अपना सकता है लेकिन मात्रा जो आर्डर दिया गया है उसमें 30% से ज्यादा ना हो।
  6. रनिंग कॉन्ट्रैक्ट के मामले में पैरा 3800 आईआरएस कंडीशन ऑफ कॉन्ट्रैक्ट ऑन Contractual क्वांटिटी वेरिएशन लागू होगा।

Monday, 12 October 2020

On Cost

On Cost

परिभाषा:

रेलवे कार्यशाला में किसी उत्पाद या सेवा के पूरा होने के लिए आवश्यक व्यय किया जाता है लेकिन, जो सीधे तौर पर उत्पाद या सेवा को आवंटित नहीं किया जा सकता है बल्कि तार्किक आधार पर विभाजित किया जाता है उसे "ऑन कॉस्ट" के रूप में जाना जाता है।

दूसरे शब्दों में किसी कार्य पर लेबर और सामग्रियों के रूप में किए जाने वाले प्रत्यक्ष व्यय (Direct Expenses) के अतिरिक्त किए गए व्यय जिससे किसी कार्य और उत्पादन पर प्रत्यक्ष रुप से प्रभृत नहीं किया जा सकता है वह ऑन कॉस्ट के रूप में जाना जाता है।

रेलवे कार्यशालाओं में ऑन-कॉस्ट को तीन भागों में बांटा गया है-

(1) प्रो-फॉर्मा ऑन-कॉस्ट
(2) जनरल ऑन- कॉस्ट
(3) शॉप ऑन-कॉस्ट

प्रो-फॉर्मा ऑन कॉस्ट

शब्द "प्रो फार्म" ऑनकोस्ट जिसे आमतौर पर "इनडायरेक्ट चार्ज" अप्रत्यक्ष प्रभार के रूप में जाना जाता है, का उद्देश्य सभी ऑन कॉस्ट को शामिल करना है, जो रेलवे कार्यशालाओं में किए गए काम की लागत में शामिल नहीं है, लेकिन जिसे वाणिज्यिक लागत में शामिल किया जाना है। इसमें या तो वैसे कार्य व्यय है जिसे अंतिम शीर्ष को प्रभृत किया गया है (जैसे सामान्य अधीक्षण, मूल्यह्रास) या रेलवे के कार्य व्यय में नहीं शामिल किए गए शुल्क है।

इस प्रकार  प्रो-फॉर्मा ऑनकोस्ट जो अंतिम शीर्ष में शामिल है निम्न है-

  1. जोनल मुख्यालय के कार्यालय में रोलिंग स्टॉक प्रबंधन के खर्च का हिस्सा और कार्यशालाओं के मैकेनिकल विभाग के कार्यालयों की स्थापना व्यय।
  2. सामान्य अधीक्षण व्यय सभी सेवा विभागों जैसे वित्त,कार्मिक और सामग्री प्रबंधन के अधिकारियों और सुरक्षा विभाग और चिकित्सा सेवाओं की कार्यालय स्थापना व्यय।
  3. गैर-पेंशन योग्य कर्मचारियों के संबंध में भविष्य निधि में सरकार का योगदान।
  4. गैर-पेंशन भोगी कर्मचारियों के संबंध में भविष्य निधि में ग्रेजुएटी और विशेष योगदान।
  5. पेंशन भोगी कर्मचारियों के संबंध में पेंशन देयताएं।
  6. कामगार मुआवजा अधिनियम के तहत भुगतान ।
  7. पौधे और इमारतों का मूल्यह्रास।
  8. निर्माण और मरम्मत की लागत के अलावा अन्य मशीनरी और संयंत्र की लागत जिसका निर्माण और मरम्मत बिल्डिंग यार्ड के लिए है।
  9. कार्यशाला कर्मचारियों की शैक्षणिक सुविधाएं।
  10. पूरे कार्यशाला में बिजली की रोशनी के रखरखाव पर हुए खर्च समस्त फिटिंग,लैंप,स्विच और मुख्य वितरण बोर्डों से केवल या वायरिंग की लागत।
* व्यय कि वह मदें जो कार्य व्यय को चार्ज नहीं किया जाता है (i)न्यू माइनर वर्क्स (ii) कुल लागत पर ब्याज (चाहे वह कैपिटल, डीएफ या राजस्व जो सभी अचल संपत्तियों पर लगाया हो।)

जनरल ऑन-कॉस्ट

जनरल ऑन-कॉस्ट उन सभी ऑन कॉस्ट को दर्शाता है जो "प्रोफॉर्मा ऑनकोस्ट" के अलावा एक कार्यशाला के भीतर एक से अधिक शॉप या विभाग के लिए खर्च किया जाता है। जनरल ऑन कॉस्ट में निम्न मदें शामिल है।

  1. कार्यशाला के कर्मचारियों की छुट्टी, बीमार, चोटिल और छुट्टी का भुगतान जिसकी मजदूरी किसी शॉप से नहीं ली जाती है जैसे की यार्ड स्थापना।
  2. वेज, ओवरटाइम कर्मचारियों का जो किसी शॉप से संलग्न नहीं है जैसे वर्कशॉप अप्रेंटिस, टूल कीपर।
  3. माल ढुलाई शुल्क जो सीधे किसी कार्य को आवंटित नहीं किए जा सकते हैं।
  4. विद्युत पावर, जिसे शॉपों को आवंटित करना संभव नहीं है।
  5. हाइड्रोलिक और न्यूमेटिक पावर और गैस जो शॉपों को आवंटित नहीं किया जा सकता है।
  6. कार्यशाला के कर्मचारियों को नोटिस के एवज में दी जाने वाली मजदूरी का भुगतान जिसे शॉपों को नहीं दिया जा सकता है।
  7. चोरी या गुम हुए सामानों का प्रतिस्थापन।
  8. प्रशिक्षुओं के स्कूल और छात्रावास पर व्यय।
  9. क्रेन और शंटिंग इंजन, लॉरी, ऑटो ट्रक पर किए गए खर्च जो कार्यशाला के उपयोग के लिए प्रदान किए गए जो शॉप ऑन पोस्ट के लिए प्रभार्य नहीं है।
  10. केंद्रीय पंपिंग प्लांट का कार्य व्यय।
  11. प्रायोगिक कार्य, जब उचित रूप से सीधे जॉब पर प्रभावित ना हो।
  12. पानी का शुल्क जो शॉपों को आवंटित नहीं किया जा सकता है।
  13. यार्ड और शंटर्स में सामान्य लेबर का मजदूरी और ओवर टाइम।
  14. कार्यशाला में स्वच्छता व्यवस्था।
  15. मैसेंजर की मजदूरी,वर्दी आदि जब शॉपों को आवंटित नहीं किया जा सकता है।
  16. सामान्य उपभोग के लिए स्टोर जो शॉपों को आवंटित नहीं किया जा सकता।
  17. मेसरूम का रखरखाव।
  18. यार्ड लाइटिंग।

शॉप ऑन-कॉस्ट

शॉप ऑन कॉस्ट में एक लेखा इकाई के भीतर होने वाले सभी ऑनकोस्ट शामिल होते हैं जैसे की एक शॉप, एक विभाग, एक अनुभाग का व्यय।शॉप ऑन कॉस्ट के निम्नलिखित उदाहरण है।

  1. विशेष शॉप से संबंधित कार्यशाला प्रशिक्षुओं की मजदूरी,ओवरटाइम इसके अतिरिक्त जब चार्ज मैन, मिस्त्री, अकुशल श्रमिक को प्रत्यक्ष रुप से काम पर ना लगाया गया हो तथा टैलीमैन, स्टोर मैन,बॉयलर, शॉप क्लर्क का व्यय।
  2. छुट्टी वेतन, निष्क्रिय समय, चोट, बीमारी, अवकाश दिवस का वेतन, यात्रा भत्ता, खेलकूद में भाग लेने वाले एवं  स्वैच्छिक कार्य में भाग लेने वाले कर्मचारियों का वेतन आदि पर व्यय।
  3. शॉप के रद्दी सामान जिससे किसी काम को आवंटित नहीं किया जा सकता है।
  4. शॉपों में प्रयुक्त स्टेशनरी और फार्म।
  5. प्रायोगिक कार्य के मामले में दोषपूर्ण और खराब किए गए कार्य।
  6. बिजली शुल्क चाहे बिजली न्यूमेटिक, गैस या हाइड्रॉलिक हो जिसे सीधे शॉपों को आवंटित किया जा सकता है।
  7. स्वचालित मशीनों के ऑपरेटरों का वेतन जिससे अन्यथा आवंटित नहीं किया गया।
  8. शॉप में कार्यरत यांत्रिक परिवहन पर लगे कर्मचारियों की मजदूरी ओवरटाइम।
  9. सभी सामान्य मजदूर एवं ट्रांसपोर्ट लेबर के मजदूरी और ओवरटाइम।
  10. हथौड़ा चलाने वाले का व्यय।
  11. मास्टर रोल और टाइम सीट के बीच छोटे अंतर।
  12. शॉप के उपयोग के लिए उपभोग्य भंडार जैसे स्नेहक तेल,एसिड आदि।
  13. कोयले और कोक का शुल्क।
  14. शॉप में लाइटिंग चार्ज।
  15. काम करने के लिए शाख।
  16. सस्पेंसन भत्ता।
  17. शॉप मैसेंजर का मजदूरी।
  18. क्रेन और शंटिंग इंजन का कार्य व्यय,लॉरी, ऑटो ट्रक जो शॉप को प्रभारित किया जा सकता है।
  19. छोटे टूल्स।


Tuesday, 18 August 2020

Wagon Turn Round

WAGON TURN ROUND

वैगन टर्न राउंड

परिभाषा-
एक वैगन के दो लगातार लोडिंग के बीच के अंतराल को वैगन टर्न राउंड कहा जाता है।

दूसरे शब्दों में वह औसत समय जो एक माल डिब्बे को लदान, गंतव्य तक पहुंचने, माल उतराई एवं अगले लदान के चक्र को पूरा करने में लगता है।

वैगन लोडिंग में निम्नलिखित शामिल है-
  1. होम रेलवे पर लादे जाने वाले औसत दैनिक डिब्बे।
  2. प्रतिदिन अन्य रेलवे से प्राप्त मालडिब्बों की संख्या।
  3. सैनिक यातायात वाहन करने वाले डिब्बों की संख्या।
  4. एक ही गेज के वैगन से माल स्थानांतरित किया जाए उनकी दैनिक औसत संख्या।
  • यह आंकड़ा परिचालन दक्षता का सूचकांक है।
  • मंडल के नियंत्रण कार्यालय में इस पर रोजाना काम किया जाता है।
  • यह यूनिट वैगन संचालन और उसके उपयोगिता की ओर दर्शाता है कम आंकड़ा को बेहतर परिणाम माना जाएगा इसलिए इसे कम करने का प्रयास किए जाने चाहिए।
वैगन टर्न राउंड गणना करने के फॉर्मूला-
T=WB/(L+R)

जहां T=वैगन टर्न राउंड
WB=प्रभावी दैनिक औसत वैगन बैलेंस (उस दिन का वैगन बैलेंस जिसमें Sick,POH Wagon को छोड़कर)
L=वैगनों के लोड की दैनिक औसत संख्या
R=दैनिक औसत लोड किए गए वैगनों की प्राप्ति

उदाहरण के लिए -
एक डिवीजन में 450 वैगन लोड हुआ (जिसमें 50 वैगन ट्रांशिपमेंट के जरिये प्राप्त हुआ ),150 इनवार्ड लोडेड वैगन प्राप्त हुआ अन्य डिवीजन से और उस दिन का कुल होल्डिंग वैगन बैलेंस 2400 है तो 
2400/(450+150)
=2400/600
=4 day Wagon Turn Round


वैगन टर्न राउंड को प्रभावित करने वाले कारक-

रेलों के बीच वैगन टर्न राउंड के आंकड़े केवल सामान्य जानकारी का विषय है। विभिन्न रेलों के बीच लदान आवर्तनों की तुलना करने से कोई उपयोगी प्रयोजन सिद्ध नहीं होगा क्योंकि यह संख्या कई कारकों से प्रभावित होती है और यह कारक भिन्न-भिन्न स्टेशनों पर अलग-अलग होते हैं।वैगन टर्न राउंड को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं।
  • औसत गमन दूरी
  • यातायात का घनत्व
  • रफ्तार को प्रभावित करने वाली तेज ढलान और लाइन सुविधाएं यथा दोहरी अथवा इकहरी।
  • जंक्शनों पर मुख्य या शाखा लाइन के कनेक्शन
लेकिन एक ही रेलवे पर विभिन्न अवधियों के बीच ये आंकड़े कुशलता सूचित करने के लिए उपयोगी है।

वैगन टर्न राउंड में सुधार किया जा सकता है-
  • वैगन के त्वरित लोडिंग और अनलोडिंग करके।
  • वैगनों को अधिकतम भार देकर।
  • मार्शलिंग यार्ड, ट्रांसशिप पॉइंट और गुड्स टर्मिनल स्टेशन में देरी को कटौती करके।
  • माल गाड़ियों के गति में सुधार करके।
  • जो वैगन मरम्मत के लिए प्रतीक्षा कर रहा है उसमें कटौती करके।

Tuesday, 11 August 2020

Scale Check Register

 

Scale Check Register

वेतनमान जांच रजिस्टर

अर्थ:-

किसी भी ग्रेड या श्रेणी में मंजूर किए गए पदों से अधिक नियुक्तियां ना हो इसके लिए स्केल चेक रजिस्टर बनाया जाता है।
          यह प्रत्येक लेखा कार्यालय में उपरोक्त को जांचने के उद्देश्य से बनाया जाता है । इन रजिस्टरों में प्रत्येक ग्रेड या श्रेणी के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग पन्ने नियत किए जाने चाहिए उसे फार्म लेखा 1407 A में रखा जाता है।

स्केल चेक रजिस्टर में पोस्टिंग-

  1. अराजपत्रित कर्मचारियों की भर्ती की सभी मंजूरियां,प्राप्त होते ही वेतनमान जांच रजिस्टर में दर्ज कर लेनी चाहिए और इस पोस्टिंग का अनुप्रमाणित (attested) अनुभाग अधिकारी (लेखा) द्वारा किया जाना चाहिए।
  2. प्रत्येक यूनिट के वेतन बिल में यूनिट की वास्तविक और मंजूरशुदा कर्मचारी संख्या का एक सारांश होना चाहिए या बिल के साथ इसका संक्षिप्त विवरण लगा होना चाहिए । बिल पास करते समय सारांश में दिखाई गई वास्तविक संख्या की जांच चार्ज किये गए वास्तविक आंकड़ों से मिलाकर की जानी चाहिए। मंजूराशुदा संख्या से अधिक का मामला हो तो संबंधित कार्यकारी प्राधिकारियों से उनके विषय में लिखा-पढ़ी की जानी चाहिए।
स्केल चेक रजिस्टर के सिद्धांत-

मंजूर किए हुए पद पर साधारणतया एक ही व्यक्ति काम पर रह सकता है और वेतन पा सकता है। यदि एक पद पर एक से अधिक कर्मचारी काम पर दिखाए गए हैं या सक्षम प्राधिकारी द्वारा मंजूर न किए गए पद पर किसी व्यक्ति को काम पर दिखाया जाता है तो संबंधित कर्मचारी का वेतन और भत्ते आपत्ति के अधीन किए जाने चाहिए।

        सिर्फ कार्यग्रहण अवधि और कार्यकारी पदों के कार्यभार सौंपने और कार्यभार ग्रहण करने के मामलों को छोड़कर।

        स्थाई कर्मचारियों का शत प्रतिशत जांच की जानी चाहिए तथा अस्थाई कर्मचारियों के मामले में यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि नियत अवधि से अधिक काम पर नहीं रखे गए हैं।

Friday, 10 July 2020

National Railway Users Consultative Council


National Railway Users Consultative Council


राष्ट्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री परिषद


  • परिषद का गठन 1953 में किया गया था।
  • रेलवे उपयोगकर्ताओं को बेहतर प्रतिनिधित्व देने और रेलवे द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवा से संबंधित मामलों पर विचार करने के उद्देश्य इस परिषद का गठन किया गया है।
  • ये परिषद तीन स्तर पर है
1.राष्ट्रीय स्तर -राष्ट्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री परिषद (National Railway Users Consultative Council (NRUCC)

2.क्षेत्रीय स्तर - क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (Zonal Railway Users Consultative Committee (ZRUCC)

3. मंडल स्तर - मंडल रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (Divisional Railway Users Consultative Committee (DRUCC)

कर्मचारियों के अनुशासन और नियुक्ति से संबंधित प्रश्न समितियों या परिषद के सामने नहीं लाने जाने चाहिए।


समिति की बैठकों या समिति के किसी भी अन्य कार्य में भाग लेने के लिए सभी गैर सरकारी सदस्यों को यात्रा और यात्रा भत्ता के लिए निशुल्क पास जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती है।

लक्ष्य-

I. रेलवे उपयोगकर्ता को बेहतर प्रतिनिधित्व।
II. सेवा से संबंधित मामलों पर रेलवे और उपयोगकर्ताओं के बीच परामर्श के लिए अधिक एवं लगातार अवसर देना।
III. यात्री सेवाओं में सुधार।

कार्य-

सुविधाओं का प्रावधान

नए स्टेशनों का उद्घाटन

यात्री सेवाएं एवं सुविधाओं में सुधार

सदस्य-

वाणिज्य मंडल, व्यापार संघ, उद्योग एसोसिएशन, कृषि संघ, विकलांग एसोसिएशन, पंजीकृत संघ, उपभोक्ता संरक्षण संगठन, विधायक, सांसद, रेलवे के अधिकारी आदि।

NRUCC-

अध्यक्ष-रेलमंत्री, सचिव-निदेशक यातायात वाणिज्यिक (सामान्य), कार्यकाल- 2 वर्ष, कार्यकाल शुरू-जुलाई से, मिलने का संख्या-2 बार।

ZRUCC-

अध्यक्ष-महाप्रबंधक, सचिव-जीएम के सचिव या जीएम द्वारा नामित अन्य अधिकारी, कार्यकाल- 2 वर्ष, कार्यकाल शुरू-अप्रैल से, मिलने का संख्या-3 बार।

DRUCC-

अध्यक्ष-डीआरएम, सचिव-Sr. Dom/Sr.Dcm, कार्यकाल- 2 वर्ष, कार्यकाल शुरू-जनवरी, मिलने का संख्या-3 बार से कम नहीं।


(2015GRP)

Tuesday, 9 June 2020

E-Recon


E-Recon

  • पूर्ण रूप-Electronic Reconciliation
  • यह एक ऑनलाइन स्थानांतरण लेनदेन(Transfer Transaction) वेब आधारित पोर्टल है जिसका शुरुआत 01.04 2011 को रेलवे में हुआ।
  • शुरुआत में यह स्वतंत्र पोर्टल के रूप में कार्य करता था अप्रैल 2019 से इसे IPAS मॉड्यूल पर लाया गया है।

उपयोगिता


  • इस पोर्टल के माध्यम से एक रेलवे के एक लेखा यूनिट से दूसरे लेखा यूनिट या एक रेलवे से दूसरे रेलवे के बीच लेखा का समायोजन एवं मिलान ऑनलाइन किया जाता है।
  • यह पोर्टल ऑनलाइन टीसी (Transfer Certificate) एक लेखा यूनिट से दूसरे लेखा यूनिट भेजना, उसे प्राप्त करना जेवी (जनरल वाउचर) बनाना और अपने लेखा को व्यवस्थित करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • अंतरण लेनदेन की दो कैटेगरी है कैश और समायोजन ।
  • कैश लेनदेन co7 के माध्यम से तैयार किया जाता है जबकि समायोजन लेनदेन जनरल वाउचर के माध्यम से तैयार किया जाता है।
  • जो भी नन कैश के आइटम होता है उसे इस पोर्टल पर टीसी बनाने के लिए सूचनाएं दर्ज करना होता है।
  • इसके लिए संबंधित डॉक्यूमेंट अपलोड किया जाता है टीसी बनाते समय समायोजन से संबंधित कॉलम को भरा जाता है जैसे कि कितने रकम की टीसी है कौन से यूनिट या रेलवे का है टीसी डेबिट है या क्रेडिट ।
  • उसके बाद टीसी जनरेट किया जाता है और स्वीकृति के लिए यूनिट को या दूसरे रेलवे का है तो मुख्यालय बुक्स के माध्यम से रेलवे को भेजा जाता है।
  • यूनिट/रेलवे टीसी को अवलोकन करने के पश्चात स्वीकृति प्रदान कर देता है यदि टीसी उस यूनिट से संबंधित नहीं है या उचित वाउचर संलग्न नहीं है तो टीसी को वापस कर दिया जाता है।
  • उदाहरण के लिए फ्यूल,पीएफ,पीओएच, जीएसटी,कॉस्ट ऑफ मटेरियल आदि का समायोजन इस माध्यम से किया जाता है।
 लाभ
1. इरकॉन के माध्यम से अंतरण लेनदेन तय समय पर संपन्न हो जाता है ।

2. इरकॉन से पहले लेखा का मिलान करने के लिए प्रत्येक तिमाही में कर्मचारियों/अधिकारियों के बीच मीटिंग होता था उसमें काफी समय व्यतीत होता था।

3. वाउचर तय समय पर संबंधित यूनिट को प्राप्त हो जाता है।

4. वाउचर लाने ले जाने लेखा का मिलान करने में कर्मचारियों पर जो टीए/डीए का व्यय होता था उसकी बचत।

Saturday, 6 June 2020

IRSDC

IRSDC 

पूर्ण रूप:-भारतीय रेलवे स्टेशन विकास निगम लिमिटेड (Indian Railways Station Development Corporation Ltd.)

  • एक SPV (Special  Purpose Vehicle),RLDA (Rail land Development Authority)रेल भूमि विकास प्राधिकरण और IRCON (Indian Railway Construction Company) का एक सयुंक्त उद्यम(Joint Venture) है।
  • यह कंपनी एक्ट 1956 के तहत 12 अप्रैल 2012 को स्थापित किया गया था।
  • IRSDC में RLDA और IRCON की इक्विटी हिस्सेदारी 50:50 के अनुपात में है।
  • वर्तमान में IRSDC की अधिकृत शेयर पूंजी 250 करोड़ रुपये है और भुगतान की गई शेयर पूंजी 51.60 करोड़ है।

कंपनी के मुख्य उद्देश्य 


  • वर्तमान/नए रेलवे स्टेशन को विकसित करना जिसमें स्टेशन निर्माण प्लेटफॉर्म की सतहों को बनाना, आदि के पुनःविकास  सहित नए निर्माण/नवीनीकरण द्वारा यात्री सुविधाओं के स्तर को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तरह विकसित करना शामिल है।
  • रेलवे सरकारी भूमि पर अचल संपत्ति के विकास के लिए परियोजनाएं शुरू करना और इसे वाणिज्यिक उपयोग में लाना यह स्टेशन के विकास में उपयोगी हो सकता है।
  • रेलवे संरचना के सभी कार्य जो रेलवे स्टेशन के विकास से जुड़े हैं उसे आगे बढ़ाना जिसमें BOT (Build-operate Transfer), BOOT (Build-Own-Operate Transfer), BLT (Build-lease Transfer) इत्यादि शामिल है।

Friday, 5 June 2020

Differences between PAC and RCC


Differences between PAC and RCC  


लोक लेखा समिति (PAC)
रेलवे अभिसमय समिति (RCC)
1.लोक लेखा समिति एक स्थाई संसदीय समिति है ।
1. यह एक अस्थायी संसदीय समिति है जो समय-समय पर लोकसभा द्वारा गठित कि जाती है।
2.लोक लेखा समिति में 22 सद्स्य होते हैं। (15 लोकसभा तथा 07 राज्यसभा)
2. रेलवे अभिसमय समिति में 18 सद्स्य होते हैं (12 लोकसभा तथा 6 राज्यसभा )
3. यह समिति केंद्र सरकार के सभी विभागों या मंत्रालयों के वित्त लेखों/ विनियोग लेखों की जाँच करती है ।
3.यह समिति सिर्फ रेलवे मंत्रालयों या भारतीय रेलों के भीतर वित्तीय मामलों में आवश्यक सुधार का सुझाव देती है ।
4. इस समिति के कार्य का दायरा बहुत व्यापक है ।
4. इस समिति के कार्य का दायरा रेलवे तक सीमित है।
5. यह समिति निम्न पर सिफारिश देती है ।
  (i) वित्त लेखा/विनियोग लेखों पर CAG कि वार्षिक रिपोर्ट की समी़क्षा कर इस पर सिफारिश देती है ।
(ii) भारत सरकार के वार्षिक लेखों की जाँच एवं समी़क्षा कर इस पर सिफारिश देती है ।
5. यह समिति निम्न पर सिफारिश देती है ।
(i) भारतीय रेलवे द्वारा भारत सरकार को दिये जाने वाले लाभांश की दर के संबंध में सिफारिश देना ।
(ii) सामान्य राज़स्व से DRF,DF, etc. में विनियोग के संबंध में सिफारिश देना।
(iii) रेलवे वित्तीय प्रशासन में लचीलापन तथा रेलवे लेखा एवम्‌ प्रबंधन में सुधार संबंधि सिफारिशें करती है।
6. लोक लेखा समिति की लगभग सभी सिफारिशें सरकार द्वारा क्रियान्वित की जाती है जो स्थाई  प्रकृति की होती है ।
6. रेलवे अभिसमय समिति की सिफारिशें सामान्यत: 5 वर्षों के लिए लागू की जाती है।

Saturday, 23 May 2020

Inventory Turnover Ratio

Inventory Turnover Ratio

  1. सेवा स्तर और सूची नियंत्रण में सुधार निरंतर सुनिश्चित करने एवं स्टॉक स्तर को अनुकूल स्तर पर रखते हुए उपयोगकर्ता विभागों को स्टोरों की उपलब्धता करवाना भंडार विभाग के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक है।
  2. इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात वस्तु सूची नियंत्रण के लिए दक्षता संकेतक है । स्टोर के संबंध में दक्षता प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को स्टॉक के अनुकूल स्तर के परिणामों की गणना इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात से मापा जाता है।
  3. इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात वर्ष के अंत तक जारी की गई कुल सामग्री से अंतिम शेष को भाग देने से प्राप्त होता है। इस अनुपात को प्रतिशत के रूप में दिखाया जाता है।
  4. इससे फ्यूल और बिना फ्यूल सामग्री के अलग-अलग गणना किया जाता है । उदाहरण के लिए भारतीय रेलवे ईयर बुक 2018-19 के अनुसार इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात 9% (ईंधन के बिना ) और 6% (ईंधन के साथ) है।
  5. इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात निकालने के लिए सूत्र निम्नलिखित है:
ITR=अंतिम सामग्री शेष (31मार्च ₹ में) ×100
  वर्ष के दौरान जारी की गई सामग्री का मूल्य (₹)


Departmental Stock Verification

Departmental Stock Verification (विभागीय स्टॉक सत्यापन)

स्टोर कोड पैरा 1339 से 1343


  • वार्डों द्वारा भंडार की सही प्राप्ति और जारी करने पर एक महत्वपूर्ण "बैंक चेक" के रूप में, यह देखने के लिए एक विभागीय जांच होना आवश्यक है कि क्या बही खाते में दर्ज किसी आइटम का शेष, वास्तविक उपलब्ध स्टॉक के शेष के बराबर है अथवा नहीं।
  • डिपो अधिकारी द्वारा इस प्रकार का विभागीय सत्यापन करने की व्यवस्था लेखा विभाग द्वारा किए जाने वाले सत्यापन के अतिरिक्त होता है।
  • विभागीय सत्यापन के अंतर्गत केवल चयनित वस्तुओं को कवर करने की आवश्यकता होती है जैसे कि भारी लौह मदें, लोहे के औजार ऐसे चुनिंदा सामानों की एक सूची तैयार की जा सकती है और भंडार नियंत्रक द्वारा अनुमोदित की जा सकती है।
  • इस प्रकार का सत्यापन वार्ड प्रभारी के अतिरिक्त किसी अन्य कर्मचारी द्वारा किया जाना चाहिए। डिपो अधिकारी सत्यापन को स्थगित कर सकता है यदि स्टॉक में शेष इतना अधिक हो कि उसका सत्यापन करने के लिए स्टॉक को हटाना पड़े। ऐसा सत्यापन उस समय आसानी से किया जा सकता है जब स्टॉक की मात्रा कम हो जाए।
  • डिपो अधिकारी निम्नलिखित परिस्थितियों में सत्यापन ना करने की अनुमति दे सकता है।
(क) लेखा विभाग द्वारा पिछले 3 महीनों के अंदर संबंधित मद का सत्यापन किया गया हो।
(ख) जब भंडारों के विशेष वर्ग का लेखा सत्यापन चल रहा हो और संबंधित मध्य का अगले दो महीनों के भीतर सत्यापन किया जाना हो।
(ग) जब संबंधित मद का शेष इतना अधिक हो कि सत्यापन करने में काफी श्रम और उनको हटाने में काफी शुल्क लगे।

उन वस्तुओं की सूची, जिन का सत्यापन (ग)के तहत छूट दी गई है, डिपो अधिकारी द्वारा तैयार किया जाना चाहिए और भंडार नियंत्रक के माध्यम से भंडार लेखा अधिकारी को भेज देनी चाहिए।

सत्यापन की प्रक्रिया

किसी मद के सत्यापन के लिए तैनात किए गए अधिकारी को सत्यापन की तारीख को बहीखाता में से उस मद के शेष को लिख लेना चाहिए और फिर बाद में सत्यापन की कार्रवाई करनी चाहिए। उसे माप तोल की विवरण आदि फील्ड बुक में दर्ज कर लेना चाहिए और उस पर संबंधित वार्ड प्रभारी के हस्ताक्षर प्राप्त करना चाहिए।


स्टॉक वेरीफिकेशन शीटस

यदि स्टॉक का उपलब्ध वास्तविक शेष, खाता शेष के बराबर हो तो स्टॉक शीट बनाने की आवश्यकता नहीं होती है। सत्यापन करने वाले अधिकारी केवल बहीखाता कार्ड/बीन कार्ड में एक इंट्री करेगा, यह दिखाने के लिए की आइटम का वास्तविक शेष, खाता शेष के बराबर है और उस पर अपना हस्ताक्षर करेगा तथा वार्ड के लिपिक का हस्ताक्षर होगा।

         अगर स्टॉक में अधिकता या कमी पाई जाती है तो अधिकारी द्वारा एस -1260 में सत्यापन शीट्स तैयार की जाएगी और उसका निपटारा लेखा सत्यापन सीट की भांति किया जाएगा।

      सत्यापन सीट पर वार्ड की प्राप्ति संख्या अंकित की जाएगी सत्यापन सीट को अधिकारी के हस्ताक्षर हेतु प्राप्त प्रस्तुत करने से पहले वार्ड के डिपो सामग्री अधीक्षक द्वारा पाई गई खामियों के लिए स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए और यह स्पष्टीकरण सत्यापन सीट की तीन प्रतियों पर दर्ज किया जाएगा। हालांकि स्टॉक शीट को सत्यापन के तारीख के 2 दिन बाद तक किसी भी खाते में नहीं रखा जाना चाहिए ।सत्यापन सीट को लेखा विभाग को भेजा जाएगा।

Monday, 25 November 2019

Budgetary Review

बजटीय समीक्षा करने के उद्देश्य
वर्ष के दौरान रेलवे बोर्ड से रेल प्रशासनों को जो भी बजट अनुदान मिलता है उस बजट अनुदान से व्यय की प्रगति के मिलान करने के लिए बजटीय समीक्षा की जाती है।बजटीय समीक्षा करने के प्रमुख उद्देश्य है।

  • बजट अनुदान और व्यय की प्रगति का मिलान करना।
  • वास्तविक व्यय जो अब वर्ष के बचे हुए महीनों में होने वाली है इसके लिए संशोधित अनुमान लगाना।
  • रेलवे बोर्ड को इसके लिए सक्षम बनाना।
इसके लिए वर्ष में दो समीक्षा की जाती है

(i)संशोधित प्राक्कलन
(ii)अंतिम आशोधन विवरण

(i) संशोधित प्राक्कलन :- यह समीक्षा नवम्बर माह में की जाती है ।इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाता है।
●बजट अनुपात।
●पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान किया गया व्यय।
●पिछले वित्तीय वर्ष के इसी अवधि के दौरान किया गया व्यय।
●बजट अनुदान

इस समीक्षा में अतिरिक्त बजट अनुदान की आवश्यकता या आवंटित बजट को सरेंडर किया जा सकता है।

(ii)अंतिम आशोधन विवरण:-यह विवरण प्रत्येक अनुदान के सम्बंध में रेल प्रशासन द्वारा बनाया जाता है।और रेलवे बोर्ड को हर वर्ष 21 फरवरी तक प्रस्तुत किया जाता है।इस विवरण का उद्देश्य यह है कि वर्तमान वित्त वर्ष में कितने अतिरिक्त आंवटन की आवश्यकता है और कितनी निधियां सरेंडर करना है।

इस विवरण में प्रत्येक अनुदान शीर्षों के अंतर्गत अतिरिक्त आंवटन स्वीकृत और प्रभृत (Voted & Charged) और सरेंडर बजट आदेशों के अनुसार दिखाए जाते हैं और इसके समर्थन में रेलवे बोर्ड के द्वारा जारी आदेशों के अनुसार पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया जाता है।

बाद में यदि कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन करना आवश्यक हो तो उसके बारे में हर वर्ष 20 मार्च से पहले सूचना भेज देनी चाहिए ताकि जहाँ तक सम्भव हो, राष्ट्रपति  मंजूरी प्रदान कर सके और आवंटन से जितना अधिक खर्च प्रत्याशित हो उसके लिए रेल प्रशासन वर्ष के 31 मार्च से पहले समय पर पुनर्विनियोग की मंजूरी दे सके।