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Friday, 15 March 2024

TYPE OF STORE

 TYPE OF STORE


स्टोर का वर्गीकरण

·         सभी मेटेरियलों को आम तौर पर दो श्रेणियों में बाँटा गया है ।

1.  स्टॉक

2.  नन-स्टॉक

·         स्टॉक आइटम- वे वस्तुएँ जिसकी नियमित माँग, नियमित निकासी या खपत और नियमित प्रतिपूर्ति होती है उसे स्टॉक आइटम कहा जाता है ।


·         नन-स्टॉक आइटम- ऐसे वस्तुएँ जिनकी नियमित तौर पर माँग न हो , जिसकी आवश्यकता कभी-कभी हो उसे नन-स्टॉक आइटम कहा जाता है, या एक बार ही माँग हो और उस स्टॉक को मेंटेन करने की आवश्यकता न हो, अर्थात ऐसा स्टॉक जिसकी ख़रीदारी माँग होने पर ही किया जाए।

 

स्टॉक को आगे निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटा गया है ।

 

·         ओरडीनरी स्टोर – ऐसा स्टोर जिसका नियमित माँग के कारण नियमित टर्नओवर होता है, उसे ओरडीनरी स्टोर कहा जाता है ।

·         आपातकालीन स्टोर (Emergency store)- स्टोर डिपो में कुछ वस्तुओं को स्टॉक करने की भी आवश्यकता होती है , भले ही इसका नियमित टर्नओवर न हो । इसमें ऐसी वस्तुएँ  शामिल है जो  आमतौर पर खराब नहीं होती है या नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन आपात स्थिति से निपटने के लिए स्टॉक में रखने की आवश्यकता होती है । इसमें ऐसी वस्तुओं रहती है जो बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं हो और इसको खरीदने में समय लग सकता है । इस तरह की वस्तुओं को आपातकालीन स्टोर कहा जाता है ।

·         अधिशेष स्टोर (Surplus Store)- ऐसा भंडार जिसे 24 महीनों तक उपयोग नहीं किया गया उसे सरप्लस स्टोर कहा जाता है। यह दो प्रकार का होता है –

1.  मुवेबल सरप्लस स्टोर- ऐसा स्टोर जिसे 24 महीनों तक प्रयोग नहीं हुआ है और आगे होने की संभावना है उसे मुवेबल सरप्लस स्टोर कहा जाता है ।

2.  डेड सरप्लस स्टोर- ऐसा स्टोर जिसे 24 महीनों तक प्रयोग नहीं हुआ है और आगे होने की संभावना न है उसे डेड सरप्लस स्टोर कहा जाता है ।

·         विशेष स्टोर ( Special Store)- ऐसा स्टोर जिसे किसी कार्य या स्पेशल उद्धेश्य के लिए आवश्यक हो जो की संचालन और सामान्य रखरखाव और मरम्मत के अलावा हो उसे स्पेशल स्टोर कहा जाता जाता है । सामान्य तौर पर ऐसे आइटमों को सीधे उपयोगकर्ता को भेज दिया जाता है उसे स्टोर डिपो में स्टॉक नहीं किया जाता है ।

·         कस्टडी स्टोर – वे भंडार जो विशेष कार्यों के लिए खरीदे गए हैं और उसे उसी कार्य को चार्ज किया जाता है जिसके लिए खरीदा गया है, लेकिन उसे स्टोर विभाग के कस्टडी में रखा जाता है उसे कस्टडी स्टोर कहा जाता है । ये स्टोर मुख्य रूप से पूँजी या राजस्व विभाग कार्यकम्र के तहत स्वीकृत रोलिंग स्टॉक के निर्माण के लिए यांत्रिक विभाग के लिए प्राप्त वस्तुएँ में शामिल होती है।

·         इम्प्रेस्ट स्टोर (अग्रदाय स्टोर)- इसमें वैसी वस्तुएँ हैं जो  दिन-प्रतिदिन के कार्य के संचालन और गतिविधि के रखरखाव के लिए आवश्यक है । अग्रदाय भंडार को या तो स्टोर को चार्ज किया जा सकता है या कैपिटल खाता में रखा जा सकता है । कुछ महत्वपूर्ण यूनिटों जैसे लोको शेड, टीएक्सआर डिपो आदि को दिन प्रतिदिन के उपयोग, रखरखाव और रोलिंग स्टॉक के संचालन आदि के लिए बड़ी संख्या में वस्तुओं की आवश्यकता होती है जैसे तेल , ग्रीस, रोलिंग स्टॉक के पुर्जे आदि । ये स्टोर डिपो के सुपरवाइजर के पास होता है । आमतौर पर इसे दो या तीन महीने की आवश्यकताओं के अनुसार रखा जाता है । अधिकांशत:  इस स्टोर को राजस्व को चार्ज किया जाता है ।

 

* निष्क्रिय भंडार (Inactive Store): ऐसी वस्तुएँ जो पिछले 12 महीनों से जारी नहीं किया गया है, और स्टॉक मौजूद है, वह निष्क्रिय या गैर-चालित वस्तुएँ कहलाती हैं। 

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Friday, 11 February 2022

Rate Contract & Running Contract

Rate Contract and Running Contract.


  • रेट कॉन्ट्रैक्ट एक ऐसा अनुबंध है जो एक निश्चित समय अवधि के दौरान सामग्री की आपूर्ति मांग के आधार पर ठेकेदार द्वारा किया जाता है।
  • रेट कॉन्ट्रैक्ट में मात्रा निश्चित नहीं की जाती है।
  • रेट कॉन्ट्रैक्ट में दर निश्चित की जाती है।
  • रेट कॉन्ट्रैक्ट में Consignee निश्चित नहीं की जाती है।
  • रेट कॉन्ट्रैक्ट नियमित खरीद कार्य में बहुत समय बचाता है।

रेट कॉन्ट्रैक्ट और रनिंग कॉन्ट्रैक्ट में अंतर-

रेट अनुबंध (Rate Contract)

चालू अनुबंध (Running Contract)

रेट कॉन्ट्रैक्ट स्टोर कोड पैरा 407 में दर्शाया गया है।

रनिंग कॉन्ट्रैक्ट स्टोर कोड पैरा 408 में दर्शाया गया है।

रेट कॉन्ट्रैक्ट एक ऐसा अनुबंध है जो एक निश्चित समय अवधि के दौरान सामग्री की आपूर्ती , मांग के आधार पर ठेकेदार द्वारा किया जाता है।

रनिंग कॉन्ट्रैक्ट एक ऐसा अनुबंध है जिसके तहत निश्चित समय अवधि के दौरान,निश्चित इकाई दरों पर ठेकेदार सामग्री की आपूर्ति के लिए संलग्न रहता है।यह दर अनुबंध के सामान है,लेकिन आर्डर की जा सकने वाली सामग्री की अधिकतम और न्यूनतम मात्रा निश्चित रहता है।

इसमें सिर्फ दर निश्चित रहता है,मात्रा निश्चित नहीं रहता है।

इसमें दर और मात्रा दोनों निश्चित रहता है।


 

Monday, 10 January 2022

OPTION CLAUSE

 

OPTION CLAUSE


  1. ऑप्शन क्लॉज़ स्टोर कॉन्ट्रैक्ट में अपनाया जाता है। ऑप्शन क्लॉज का अर्थ है कि ऐसे अनुबंध जो अनुबंधित हो गया है रेलवे अपने हित में Quantity (मात्रा) को +/-30% तक सामग्री प्राप्त होने के समय तक या अगर सामग्री प्राप्त होने की समय सीमा बढ़ाई गई है तो उस समय तक बढ़ा/घटा सकती है।
  2. यह स्पेशल कंडीशन ऑफ कॉन्ट्रैक्ट के तहत फिक्स क्वांटिटी ऑफ कॉन्ट्रैक्ट के लिए, वैसे मेटेरियल जो लगातार प्रयोग करने की प्रकृति का है उस पर अपनाया जाता है।
  3. ऑप्शन क्लोज वैसे अनुबंध के लिए अपनाया जाता है जिसका न्यूनतम वैल्यू 75 लाख हो। हालांकि खरीद मूल्य 75 लाख से कम होने पर भी ऑप्शन क्लोज लगाया जा सकता है अगर रेलवे के फायदे में हो एवं मेटेरियल continuing nature के हो।
  4. टेंडर स्वीकृत करने वाले प्राधिकारी ऑप्शन क्लोज को अनुमोदित कर सकते हैं , इसके लिए वित्तीय सहमति की आवश्यकता नहीं होती है सिर्फ जो मोडिफिकेशन किया गया है उसका वेट फाइनेंस से करवाया जा सकता है Non TC(tender committee) के मामले में वित्तीय सहमति की आवश्यकता है।
  5. खरीददार ऑप्शन क्लोज को एक या एक से ज्यादा किस्तों में अपना सकता है लेकिन मात्रा जो आर्डर दिया गया है उसमें 30% से ज्यादा ना हो।
  6. रनिंग कॉन्ट्रैक्ट के मामले में पैरा 3800 आईआरएस कंडीशन ऑफ कॉन्ट्रैक्ट ऑन Contractual क्वांटिटी वेरिएशन लागू होगा।

Tuesday, 23 June 2020

Store Suspense

Store Suspense (स्टोर सस्पेंस)


परिभाषा:-

भारतीय रेलवे एक बड़ा परिवहन संगठन है इसे अपने नियमित रखरखाव और विभिन्न सेवाओं के रखरखाव के लिए आवश्यक वस्तुओं की खरीद या निर्माण और स्टॉक की आवश्यकता होती है। अतः जो भी स्टोर खरीदा जाता है वह कैपिटल इंटेंसिव है इसे रेलवे के विभिन्न डिपों में स्टॉक किए जाते हैं।

             चूँकि डिपो में सामग्री की प्राप्ति शुरू में स्टॉकिंग के लिए किया जाता है बाद में इसे उपभोग करने वाले विभागों को दिया जाता है। अतः जब तक उपभोग करने वाले विभागों को सामग्री नहीं दिया जाता है, तब तक इसे अंतिम शीर्ष में रखा नहीं जा सकता है। इसलिए सामग्री को अस्थाई रूप से सस्पेंस खाते में रखा जाता है और इसके क्लीयरेंस पर ध्यान रखा जाता है। स्टोर सस्पेंस कैपिटल सस्पेंस है जो प्लान हेड 71 के अंतर्गत संचालित होता है।

स्टोर सस्पेन्स के प्रकार:-

1. क्रय सस्पेन्स (Purchase Suspense)
2. विक्रय सस्पेन्स (Sales Suspense)
3. स्टोर-इन-ट्रांजिट
4. स्टोर-इन-स्टॉक
5.स्टॉक समायोजन लेखा (Stock Adjustment Accounts)

1.क्रय सस्पेंस --

जब आपूर्तिकर्ता द्वारा सामग्री डिपो को आपूर्ति की जाती है तो उसे एक प्राप्ति नोट की प्रतिलिपि प्राप्त होती है जो भुगतान का दावा करने के लिए आवश्यक है । जो भी सामग्री डिपो में प्राप्त की जाती है उसका भुगतान लेखा कार्यालय द्वारा किया जाता है। अतः लेनदेन जहां सामग्री प्राप्त की जाती है लेकिन उसका भुगतान क्रय सस्पेंस के माध्यम से किया जाता है। जितने भी मूल्य के सामग्री डिपो में प्राप्त हुआ उस राशि से परचेज सस्पेंस को डेबिट कर दिया जाता है और जब प्राप्ति रसीद की कॉपी लेखा विभाग में प्राप्त होती है तो परचेस सस्पेंस को क्रेडिट कर दिया जाता है।इस उचन्त शीर्ष का मुख्य उद्देश्य है आपूर्तिकर्ताओं को सही और शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना।

(1) परचेज सस्पेंस में क्रेडिट आउटस्टैंडिंग का अर्थ हुआ कि सामग्री प्राप्त हो चुकी है, जबकि भुगतान किया जाना बाकी है।
(2) परचेज सस्पेंस में डेबिट आउटस्टैंडिंग का अर्थ हुआ कि अग्रिम भुगतान कर दिया गया है किंतु सामग्री अभी प्राप्त नहीं हुई है।

          सामान्यतः परचेज सस्पेंस में क्रेडिट बैलेंस रहता है अपवाद स्वरूप प्रतिष्ठित फार्म को अग्रिम भुगतान के मामले में डेबिट बैलेंस होगा।

जनरल एंट्री इस प्रकार होगी:-

1.जब प्राप्ति रसीद प्राप्त होती है-

स्टोर-इन-ट्रांजिट...................... Dr.
To परचेज सस्पेन्स..................Cr.

2. जब बिल का भुगतान कर दिया जाता है-

परचेज सस्पेन्स...................Dr.
To चेक & बिल्स................Cr.

अब iMMS (Integrated Material Management Information System) के तहत

-खरीद उचन्त के रखरखाव में तीन महत्वपूर्ण गतिविधियां शामिल है।

* क्रेडिट की पोस्टिंग, डेबिट की पोस्टिंग, सस्पेंस का सफाया और आर्थिक समीक्षा मासिक,त्रैमासिक, अर्धवार्षिक ।
* परचेज सस्पेंस के रखरखाव में लेन-देन को ओरेकल डाटा बेस के साथ आई एम एम एस मॉड्यूल के तहत लाया गया है।
* प्राप्ति नोट डेटाबेस से सीधे जुड़े हुए हैं अतः प्राप्ति नोट अपने आप तैयार होता है।
* वर्ष के अंत में सस्पेंस बैलेंस को खत्म करने के लिए रिपोर्ट तैयार की जाती है।

क्रेडिट की पोस्टिंग

* क्रेडिट की पोस्टिंग जो प्राप्ति नोट से संबंधित है जो प्रत्येक डिपों से प्राप्त होता है इसमें नंबर, तारीख, पीओ नंबर , फार्म का नाम, प्रेषण विवरण,दर,मात्रा और मूल्य की पोस्टिंग किया जाता है यह सब ऑनलाइन किया जाता है।
* आई एम एम एस मॉडल के तहत कंप्यूटरीकरण को ध्यान में रखते हुए एक बार आर नोट, माह,डिपो कंप्यूटर में फीड हो जाने के बाद प्रोग्राम स्वतः ही विवरण को डेबिट के साथ जोड़ देता है।
* सभी बकाया मदें प्रबंधकीय समीक्षा के अंतर्गत है अग्रिम भुगतान के मामले में एक बार आर नोट विवरण डिपो को जोड़ने वाले कंप्यूटर में फीड हो जाता है तो भुगतान का विवरण स्वचालित रूप से लिंक हो जाता है।
*डिपो वार आवंटन रिपोर्ट मासिक आधार पर तैयार की जाती है।
* प्रत्येक डिपो के क्रेडिट का सारांश प्रत्येक डिपो मैनेजर के लिए उपलब्ध रहता है ताकि अंत में कोई शेष नहीं बचे इसकी समीक्षा की जा सके।

डेबिट की पोस्टिंग

* खरीद सस्पेंस डेबिट का विवरण स्वचालित रूप से मासिक आधार पर बिल ,RBC,MAR अनुभागों को स्थानांतरित हो जाता है।
* E-recon में प्राप्त टीसी को AFA/SSO बुक्स सेक्शन के प्राधिकरण के साथ बुक सेक्शन द्वारा दर्ज किया जाता है जिसे डेबिट के रूप में पोस्ट किया जाता है जिससे प्रोग्राम क्रेडिट को लिंक कर सके।

 *स्टॉक/गैर स्टॉक मदों के इकाई वार निपटाया जाता है मदों को जोड़ने के लिए रिपोर्ट तैयार की जाती है।




2.विक्रय सस्पेन्स (Sales Suspense) 

यह उचन्त शीर्ष प्रचालन में परचेज सस्पेंस के विपरीत है जैसे कि जितने मूल्य के सामग्री प्राप्त होती है उससे परचेज सस्पेन्स को क्रेडिट किया जाता है जबकि जितने मूल्य के स्क्रैप बेचे हैं उससे सेल्स सस्पेंस को क्रेडिट किया जाता है। अन्य पक्षों को बेचे गए सामान की कीमत की वसूली पर निगरानी रखना इस उचन्त शीर्ष के प्रचालन का मुख्य उद्देश्य है।

इसकी जनरल एंट्री इस प्रकार होगी-

1.जब EMD और बैलेंस सेल वैल्यू खरीददार द्वारा भुगतान किया जाता है तो-

Remittance into Bank(RIB)............Dr.

To Sales Suspense.............................Cr.

2.जब बेचा हुआ स्क्रैप पहुँच जाता है और सेल इश्यू नोट तैयार हो जाता है-

Sales Suspense.....................Dr.
To Store-in-Stock.................Cr.

सेल्स सस्पेंस में हमेशा क्रेडिट बैलेंस होना चाहिए।डेबिट बैलेंस स्टोर-इन-स्टॉक में भुगतान किए बिना प्राप्त सामग्री का प्रतिनिधित्व करता है या नीलामी में बेचे गए मात्रा से अधिक सामग्री का प्रतिनिधित्व करता है।

3.स्टोर-इन-ट्रांजिट-

स्टोर-इन-ट्रांजिट दो प्रकार के हैं-
1.स्टोर-इन-ट्रांजिट -परचेज
2.स्टोर-इन-ट्रांजिट -डिपो ट्रांसफर
स्टोर-इन-ट्रांजिट में हमेशा डेबिट बैलेंस होगा।

स्टोर-इन-ट्रांजिट-परचेज

इस शीर्ष का प्रचालन उस समय होता है जब खरीदे गए सामान की प्राप्ति और निरीक्षण केंद्रीय स्थान पर होता है और बाद में भंडार के लिए अन्य डिपुओं में भेजा जाता है। भंडार डिपो में जब तक सामग्री प्राप्त नहीं हो जाता है तो सामग्री की कीमत से परचेज शीर्ष को क्रेडिट और स्टोर-इन-ट्रांजिट परचेज को डेबिट की जाती है। स्टॉकिंग डिपो द्वारा सामग्री प्राप्त करने और उसका लेखा करने के बाद यह डेबिट क्लियर हो जाएगा।

स्टोर-इन-ट्रांजिट परचेज का जनरल एंट्री-

1.जब प्राप्ति नोट केंद्रीयकृत प्राप्ति और निरीक्षण अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है तो-

Store-in-transit Purchase.............Dr.
To Purchase Suspense...................Cr.

2. स्टॉकिंग डिपो द्वारा सामग्री का लेखा करने के बाद

Store-in-stock.................... Dr.
To Store-in-transit Purchase...Cr.

स्टोर-इन-ट्रांजिट -डिपो ट्रांसफर-

जब स्टोर महीने के दौरान किसी डिपो द्वारा दूसरे डिपो के लिए जारी किया जाता है और उसी महीना वह सामग्री लेखा में प्रदर्शित नहीं होता है। इस स्थिति में जितने वैल्यू के स्टोर है वह स्टोर-इन- ट्रांजिट डिपो ट्रांसफर शीर्ष में डेबिट प्रदर्शित होगा। यह डेबिट तब क्लियर हो जाएगा जब प्राप्ति डिपो मटेरियल की प्राप्ति का लेखा कर लेंगे।

इसका लेखाकरण इस प्रकार किया जाएगा
1.जब सामग्री जारी करने वाले डिपो द्वारा इश्यू नोट महीने के दौरान जारी किया गया किंतु रिसीविंग डिपो उसका लेखाकरण उसी महीने नहीं किया तो-

Store-in-transit Depot transfer.......Dr.
To Store-in-stock of issuing depot...(-)Dr.

2.जब सामग्री प्राप्त हो जाएगा और लेखाकरण कर लिया जाएगा रिसीविंग डिपो द्वारा तो-

Store-in-stock of receiving Depot....Dr.
To Store-in-transit Depot transfer....Cr.

4.स्टोर-इन-स्टॉक

यह बहुत ही महत्वपूर्ण उचन्त शीर्ष है। यह सस्पेंस खाता डिपो वार रखा जाता है और यह डिपो में प्राप्त सामग्री का निरीक्षण और लेखा करता है। सामग्री की प्राप्ति पर और लेखा करने के बाद एक रसीद नोट तैयार किया जाता है जो इस खाते के डेबिट पक्ष को पोस्ट करने का आधार है। इसका लेनदेन इस प्रकार होगा-

1. स्टोर-इन-स्टॉक AC......... Dr.
To परचेज सस्पेंस AC..........Cr.

2. जब डिपो द्वारा उपभोग करने वाले विभाग को सामग्री जारी कर दिया जाता है और इश्यू नोट तैयार किया जाता है तो-

राजस्व मांग/संबंधित कार्य...............Dr.
To स्टोर-इन-स्टॉक AC..................Cr.

यह उचन्त शीर्ष हमेशा डेबिट बैलेंस प्रदर्शित करेगा इस हेड के तहत आउटस्टैंडिंग डेबिट बैलेंस इन्वेंटरी ऑन हैंड बताता है।

5.स्टॉक समायोजन लेखा(Stock adjustment Account)


इस सस्पेंस हेड का प्रचालन स्टोर में विभिन्न अंतरों के लिए किया जाता है इसके तीन भाग है-

1.स्टॉक में अंतर-

(i) आवधिक लेखा स्टॉक सत्यापन के दौरान।
(ii) विभागीय स्टॉक सत्यापन के दौरान।

2.स्टॉक के कीमत में अंतर-

(i)बाजार से खरीदे गए उत्पादों की कीमत में परिवर्तन।
(ii) वर्कशॉप में निर्मित उत्पादों की कीमत में परिवर्तन।

3.विविध

(i) स्क्रैप बिक्री के समय बुक वैल्यू और वास्तविक मूल्य में अंतर।
(ii) हानि,चोरी,अप्रचलन आदि के कारण अंतर।
(iii) सेकंड हैंड/स्क्रैप के कारण नई सामग्री का वर्गीकरण।
(iv) राउंडिंग ऑफ के कारण।
(v) डिपो स्टॉक शीट, बुक ट्रांसफर के द्वारा विविध मदों का समायोजन।

        इस खाते में डेबिट और क्रेडिट अलग-अलग पोस्ट किया जाता है। इस हेड के तहत सभी मदों को 6 महीने के भीतर क्लियर कर देना चाहिए। छोटे मूल्य के सभी मदें जो उपयोग पूर्ण नहीं है अंतिम शीर्ष को डेबिट कर क्लियर कर देना चाहिए। बचे हुए मदों को प्रत्येक तिमाही में महाप्रबंधक को रिपोर्ट करना चाहिए महाप्रबंधक के आदेशानुसार मदों को डेबिट या क्रेडिट करना चाहिए।


Thursday, 11 June 2020

iMMS


iMMS

फूल फॉर्म

Integrated Material Management System

  • शुरुआत में MMIS (Material Managment Information Systems) सबसे पहले 1998 में सेंट्रल रेलवे में शुरू किया गया था।
  • वर्तमान में iMMS को क्रिस द्वारा विकसित किया गया है जो एक केंद्रीयकृत प्रणाली है। 
  • इसके कार्यान्वयन से सामग्री की खरीद और आपूर्ति में पारदर्शिता आएगी ।
  • इसका उद्देश्य है रेलवे के सभी विभागों के यूजर डिपो को कंप्यूटरीकृत करना।
  • भारतीय रेलवे में iMMS परियोजना को दिसंबर 2019 से लागू करने की योजना है।

डिपो कंप्यूटरीकृत प्रणाली में निम्नलिखित विशेषताएं हैं:-

1. संबंधित Consignee एवम अधिकारी द्वारा उनके रोल के आधार पर केंद्रीकृत होस्टिंग किया जा सकता है।
2. इसके द्वारा ऑनलाइन लेनदेन जिसमें डेली ट्रांसजेक्शन रजिस्टर,लेजर का रखरखाव, इशू नोट, गेट पास आदि कार्य किया जाता है।
3. इस सिस्टम के माध्यम से स्टॉक इंडेन और नन-स्टॉक इंडेन जनरेट होगा।
4.डीपो के प्रोटोकॉल को मौजूदा रूप में डिजिटल सिस्टम के माध्यम से रखरखाव होगा।
5.iMMS/IREPS का एकीकरण।
6.डैशबोर्ड में प्रबंधन सूचना प्रणाली।

Saturday, 23 May 2020

Inventory Turnover Ratio

Inventory Turnover Ratio

  1. सेवा स्तर और सूची नियंत्रण में सुधार निरंतर सुनिश्चित करने एवं स्टॉक स्तर को अनुकूल स्तर पर रखते हुए उपयोगकर्ता विभागों को स्टोरों की उपलब्धता करवाना भंडार विभाग के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक है।
  2. इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात वस्तु सूची नियंत्रण के लिए दक्षता संकेतक है । स्टोर के संबंध में दक्षता प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को स्टॉक के अनुकूल स्तर के परिणामों की गणना इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात से मापा जाता है।
  3. इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात वर्ष के अंत तक जारी की गई कुल सामग्री से अंतिम शेष को भाग देने से प्राप्त होता है। इस अनुपात को प्रतिशत के रूप में दिखाया जाता है।
  4. इससे फ्यूल और बिना फ्यूल सामग्री के अलग-अलग गणना किया जाता है । उदाहरण के लिए भारतीय रेलवे ईयर बुक 2018-19 के अनुसार इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात 9% (ईंधन के बिना ) और 6% (ईंधन के साथ) है।
  5. इन्वेंटरी टर्नओवर अनुपात निकालने के लिए सूत्र निम्नलिखित है:
ITR=अंतिम सामग्री शेष (31मार्च ₹ में) ×100
  वर्ष के दौरान जारी की गई सामग्री का मूल्य (₹)


Departmental Stock Verification

Departmental Stock Verification (विभागीय स्टॉक सत्यापन)

स्टोर कोड पैरा 1339 से 1343


  • वार्डों द्वारा भंडार की सही प्राप्ति और जारी करने पर एक महत्वपूर्ण "बैंक चेक" के रूप में, यह देखने के लिए एक विभागीय जांच होना आवश्यक है कि क्या बही खाते में दर्ज किसी आइटम का शेष, वास्तविक उपलब्ध स्टॉक के शेष के बराबर है अथवा नहीं।
  • डिपो अधिकारी द्वारा इस प्रकार का विभागीय सत्यापन करने की व्यवस्था लेखा विभाग द्वारा किए जाने वाले सत्यापन के अतिरिक्त होता है।
  • विभागीय सत्यापन के अंतर्गत केवल चयनित वस्तुओं को कवर करने की आवश्यकता होती है जैसे कि भारी लौह मदें, लोहे के औजार ऐसे चुनिंदा सामानों की एक सूची तैयार की जा सकती है और भंडार नियंत्रक द्वारा अनुमोदित की जा सकती है।
  • इस प्रकार का सत्यापन वार्ड प्रभारी के अतिरिक्त किसी अन्य कर्मचारी द्वारा किया जाना चाहिए। डिपो अधिकारी सत्यापन को स्थगित कर सकता है यदि स्टॉक में शेष इतना अधिक हो कि उसका सत्यापन करने के लिए स्टॉक को हटाना पड़े। ऐसा सत्यापन उस समय आसानी से किया जा सकता है जब स्टॉक की मात्रा कम हो जाए।
  • डिपो अधिकारी निम्नलिखित परिस्थितियों में सत्यापन ना करने की अनुमति दे सकता है।
(क) लेखा विभाग द्वारा पिछले 3 महीनों के अंदर संबंधित मद का सत्यापन किया गया हो।
(ख) जब भंडारों के विशेष वर्ग का लेखा सत्यापन चल रहा हो और संबंधित मध्य का अगले दो महीनों के भीतर सत्यापन किया जाना हो।
(ग) जब संबंधित मद का शेष इतना अधिक हो कि सत्यापन करने में काफी श्रम और उनको हटाने में काफी शुल्क लगे।

उन वस्तुओं की सूची, जिन का सत्यापन (ग)के तहत छूट दी गई है, डिपो अधिकारी द्वारा तैयार किया जाना चाहिए और भंडार नियंत्रक के माध्यम से भंडार लेखा अधिकारी को भेज देनी चाहिए।

सत्यापन की प्रक्रिया

किसी मद के सत्यापन के लिए तैनात किए गए अधिकारी को सत्यापन की तारीख को बहीखाता में से उस मद के शेष को लिख लेना चाहिए और फिर बाद में सत्यापन की कार्रवाई करनी चाहिए। उसे माप तोल की विवरण आदि फील्ड बुक में दर्ज कर लेना चाहिए और उस पर संबंधित वार्ड प्रभारी के हस्ताक्षर प्राप्त करना चाहिए।


स्टॉक वेरीफिकेशन शीटस

यदि स्टॉक का उपलब्ध वास्तविक शेष, खाता शेष के बराबर हो तो स्टॉक शीट बनाने की आवश्यकता नहीं होती है। सत्यापन करने वाले अधिकारी केवल बहीखाता कार्ड/बीन कार्ड में एक इंट्री करेगा, यह दिखाने के लिए की आइटम का वास्तविक शेष, खाता शेष के बराबर है और उस पर अपना हस्ताक्षर करेगा तथा वार्ड के लिपिक का हस्ताक्षर होगा।

         अगर स्टॉक में अधिकता या कमी पाई जाती है तो अधिकारी द्वारा एस -1260 में सत्यापन शीट्स तैयार की जाएगी और उसका निपटारा लेखा सत्यापन सीट की भांति किया जाएगा।

      सत्यापन सीट पर वार्ड की प्राप्ति संख्या अंकित की जाएगी सत्यापन सीट को अधिकारी के हस्ताक्षर हेतु प्राप्त प्रस्तुत करने से पहले वार्ड के डिपो सामग्री अधीक्षक द्वारा पाई गई खामियों के लिए स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए और यह स्पष्टीकरण सत्यापन सीट की तीन प्रतियों पर दर्ज किया जाएगा। हालांकि स्टॉक शीट को सत्यापन के तारीख के 2 दिन बाद तक किसी भी खाते में नहीं रखा जाना चाहिए ।सत्यापन सीट को लेखा विभाग को भेजा जाएगा।