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Friday, 18 September 2020

Lease and License

 Lease & License


लीज और लाइसेंस-


लीज:- 1.उपयोगकर्ता एवं मालिक के बीच एक समझौता है जिसमें उपयोगकर्ता संपत्ति के उपयोग के बदले में एक निर्धारित किराया का भुगतान करता है।


2. संपत्ति अधिनियम 1882 के हस्तांतरण की धारा 105 के अनुसार "पूर्व निर्धारित समय तक संपत्ति का उपयोग करने का अधिकार" सम्पत्ति के मालिक द्वारा संपत्ति के उपयोगकर्ता को दी जाती है।


लाइसेंस:- 1. लाइसेंस के बिना किसी तीसरे पक्ष द्वारा बौद्धिक संपदा का उपयोग करना नियम का उल्लंघन है।

2. भारतीय सुविधा अधिनियम 1882 की धारा 52 के अनुसार लाइसेंस,लाइसेंसधारक को संपत्ति के किसी भी हिस्से पर कब्जा करने का अधिकार नहीं देता है बल्कि सीमित अवधि के लिए संपत्ति का उपयोग करने की अनुमति देता है।




लीज

लाइसेंस

  1. पार्टी - मालिक और उपयोगकर्ता

1.पार्टी - लाइसेंसर (जिसने अनुमति दी), लाइसेंसी (जिसे अनुमति दी गई)

  1. एक समय अवधि के लिए पट्टेदार को संपत्ति के अधिग्रहण की अनुमति देता है।

2. लाइसेंसधारी को इस प्रकार की कोई अनुमति नहीं दी जाती है। 

  1. यह अपरिवर्तनीय है, अर्थात अनुबंध पूरा होने से पहले उसको रद्द नहीं किया जा सकता है।

3. लाइसेंसधारी की इच्छा पर समझौता को पूरा होने से पहले रद्द किया जा सकता है।

  1. इसे लीज रेंट के रूप में जाना जाता है।

4. इसे लाइसेंस फी के रूप में जाना जाता है।

  1. यह हस्तांतरणीय है अर्थात पट्टेदार तीसरे पक्ष को पट्टा हस्तांरित कर सकता है।

5. यह अहस्तांतरणीय है।

  1. उपयोगकर्ता कोई भी सुधार संपत्ति में कर सकता है।

6. लाइसेंसधारी कोई भी सुधार संपत्ति में नहीं कर सकता है।

  1. पट्टेदार के मृत्यु होने पर करार समाप्त नहीं होता है।

7.  इसमें समाप्त हो जाता है।


Wednesday, 16 September 2020

Viability Gap Funding

VIABILITY GAP FUNDING.


  1. इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सार्वजनिक निजी भागीदारी (Public Private Partnership) के सपोर्ट के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा 2005 में एक योजना लाई गई जिसे वायबिलिटी गैप फंडिंग कहते हैं।
  2. इस योजना के तहत भारत सरकार ने अपनी वायबिलिटी गैप फण्ड (व्यवहार्यता अंतर निधि) से पूंजीगत अनुदान के रूप में परियोजना की लागत के 20% की वायबिलिटी गैप को आर्थिक रूप से समर्थन करने का प्रावधान किया है।
  3. यह योजना भारत सरकार या उसकी एजेंसियों द्वारा ली गई सार्वजनिक निजी भागीदारी परियोजनाओं के लिए सीमित है।जहाँ निजी क्षेत्र का चयन खुली प्रतिस्पर्धात्मक सार्वजनिक बोली के माध्यम से किया जाता है।
  4. साथ ही परियोजना का स्वामित्व करने वाली राज्य सरकार या उसकी एजेंसियों भी अपने बजट से अतिरिक्त अनुदान प्रदान कर सकती है, जो परियोजना की कुल लागत का 20% से अधिक न हो।
  5. इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के विकास के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होती है और इसे सार्वजनिक वित्त पोषण से बाहर नहीं किया जा सकता है।इसी तरह ऐसी परियोजनाओं केवल स्टैंड के आधार पर वित्तीय रूप से व्यवहार्य नहीं है, क्योंकि उनके पास परियोजनाओं के लिए एक लंबी अवधि होती है और सीमित वित्तीय रिटर्न् होता है।इसलिए वे निजी क्षेत्र के लिए आकर्षक नहीं है।
  6. इस परियोजना के अंतर्गत रोड, पोर्ट,एयरपोर्ट, रेलवे,वाटर वे,शहरी ट्रांसपोर्ट, पावर,वाटर सप्लाई,अन्य भौतिक संरचना शहरी क्षेत्रों में पर्यटन क्षेत्र आएंगे।सरकार इसमें सार्वजनिक कल्याण वाले नए क्षेत्र भी जोड़े हैं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य।

Friday, 11 September 2020